Brent Crude में 6% की गिरावट, तो जापानी येन में आई तेज़ी; जानें क्या है वजह

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AuthorAditya Rao|Published at:
Brent Crude में 6% की गिरावट, तो जापानी येन में आई तेज़ी; जानें क्या है वजह

ईरान के साथ बातचीत की उम्मीदों के बीच ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) की कीमतों में 6% से ज़्यादा की गिरावट आई है। वहीं, जापानी येन (Japanese Yen) में भी 1% का उछाल देखा गया, जिसकी वजह अमेरिका और जापान का दुर्लभ करेंसी इंटरवेंशन है। इन ग्लोबल घटनाओं ने एशियाई बाजारों में सतर्कता बढ़ा दी है।

तेल की कीमतों में आई बड़ी गिरावट

सोमवार को वैश्विक कमोडिटी और करेंसी बाजारों में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखा गया। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में अचानक 6% से ज़्यादा की गिरावट आई और यह $82.41 प्रति बैरल पर आ गया। इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच संभावित कूटनीतिक बातचीत की उम्मीदें हैं।

भू-राजनीतिक तनाव का असर

तेल की कीमतों में यह कमी हाल के उन संकेतों के बाद आई है, जिनमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की परमाणु गतिविधियों को लेकर सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत को प्राथमिकता देने की बात कही थी। हार्मोन जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है, बाजार की निगाहों में बना हुआ है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह की रुकावट से आपूर्ति बाधित होने के डर से तेल की कीमतें अक्सर बढ़ जाती हैं। हालांकि, अब बातचीत की संभावनाओं से यह जोखिम कम हो गया है, जिसके चलते फ्यूचर्स मार्केट में कीमतों में यह तेज गिरावट आई है।

जापानी येन में आई तेज़ी

करेंसी बाजार में, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन 1% से ज़्यादा उछलकर 155.39 पर पहुँच गया। यह जापान के वित्त मंत्रालय द्वारा अमेरिका के साथ मिलकर किए गए एक दुर्लभ, समन्वित इंटरवेंशन की आधिकारिक पुष्टि के बाद हुआ। इस कदम का मकसद येन को दशकों के निचले स्तर पर फिसलने से रोकना था। हालांकि, यह इंटरवेंशन येन को कुछ समय के लिए सहारा देने में कामयाब रहा, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यह सट्टेबाजों को चेतावनी देने के लिए था, न कि दीर्घकालिक प्रवृत्ति को बदलने के लिए। अमेरिका और जापान के बीच ब्याज दरों में बड़े अंतर के कारण येन पर दबाव बना हुआ है, क्योंकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें बैंक ऑफ जापान की तुलना में अधिक हैं।

एशियाई बाजारों पर असर

इन घटनाओं पर एशियाई शेयर बाजारों ने सतर्क प्रतिक्रिया व्यक्त की। जापान के निक्केई इंडेक्स में 1% की गिरावट आई, जबकि दक्षिण कोरिया के KOSPI इंडेक्स में 3.6% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। MSCI एशिया-पैसेफिक इंडेक्स भी शुरुआती कारोबार में 1% नीचे आ गया। निवेशक फिलहाल कम तेल कीमतों से मिली राहत को, जो भारत जैसी ऊर्जा-आयात करने वाली अर्थव्यवस्थाओं के लिए फायदेमंद हो सकती है, और भू-राजनीतिक बदलावों व समन्वित मुद्रा इंटरवेंशन से पैदा हुई व्यापक अनिश्चितता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स में कुछ सकारात्मक रुझान दिखा, लेकिन एशिया में फिलहाल अस्थिरता का माहौल है क्योंकि निवेशक इन बदलावों के वैश्विक व्यापार और मुद्रास्फीति पर पड़ने वाले प्रभावों को समझ रहे हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.