Brent crude की कीमतों में पिछले एक हफ्ते में **9.3%** का उछाल आया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते कीमतें अब **$96-$98** के मजबूत रेजिस्टेंस जोन (resistance zone) तक पहुंच गई हैं, जहां से इसमें मामूली गिरावट की संभावना जताई जा रही है।
ग्लोबल ऑयल मार्केट में हलचल तेज है। Brent crude फ्यूचर्स जुलाई 2026 के बाद के अपने सबसे मजबूत हफ्ते से गुजर रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते जियोपोलिटिकल (geopolitical) तनाव का सीधा असर कमोडिटी की कीमतों पर दिख रहा है।
टेक्निकल चार्ट पर क्या है स्थिति?
टेक्निकल एनालिस्ट्स के मुताबिक, $96 से $98 प्रति बैरल का दायरा एक मजबूत रेजिस्टेंस का काम कर रहा है। यह एक ऐसा साइकोलॉजिकल लेवल है जिसे पार करना तेल के लिए फिलहाल मुश्किल लग रहा है। अगर यह तेजी थमती है, तो कीमतें $90.50 के लेवल तक नीचे आ सकती हैं, जहां इन्हें नया सपोर्ट मिल सकता है।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर
भारत के लिए यह खबर काफी अहम है। 1 सितंबर 2026 तक भारतीय बास्केट का कच्चा तेल करीब $95.28 प्रति बैरल था। राहत की बात यह है कि देश में पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमतें अभी स्थिर हैं। हालांकि, ग्लोबल लेवल पर कच्चे तेल के दाम ज्यादा बने रहना लंबे समय में देश के इम्पोर्ट बिल और महंगाई दर (inflation) के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
तनाव की असली वजह
मिडिल ईस्ट में अस्थिरता और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास सप्लाई में बाधा आने का डर ट्रेडर्स को डरा रहा है। अगर तनाव बढ़ता है, तो कीमतों में और तेजी देखी जा सकती है। वहीं, अगर जियोपोलिटिकल गर्माहट ठंडी हुई, तो बाजार में $90 की तरफ सुधार (correction) भी मुमकिन है।
फिलहाल, मार्केट की नजरें मिडल ईस्ट से आने वाली खबरों और ग्लोबल बेंचमार्क की मूवमेंट पर टिकी हैं, जो तय करेंगी कि तेल की कीमतें $98 के पार जाती हैं या यहां से फिसलकर कंसोलिडेशन मोड में जाती हैं।
