मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण Brent Crude ऑइल की कीमतें **$100** प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने के डर से भारतीय शेयर बाजार में भी सुस्ती देखी जा रही है और Sensex-Nifty लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं।
ग्लोबल मार्केट में टेंशन
मिडिल ईस्ट में बढ़ते मिलिट्री तनाव ने ग्लोबल मार्केट को हिला कर रख दिया है। 8 सितंबर को हुई सैन्य कार्रवाई के बाद Brent Crude $100 प्रति बैरल के लेवल को छूने की तैयारी कर रहा है। तनाव की शुरुआत तब हुई जब U.S. सेंट्रल कमांड ने 5 ईरानी ऑइल कैरियर्स को नष्ट कर दिया, जो कि Islamic Revolutionary Guard Corps द्वारा U.S. नेवी के जंगी जहाज पर किए गए मिसाइल हमले का जवाब था।
भारतीय बाजार पर क्या होगा असर?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। क्रूड ऑइल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर देश के इम्पोर्ट बिल पर पड़ेगा, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। इसके चलते 9 सितंबर को Sensex और Nifty 50 गिरावट के साथ खुले। निवेशकों को डर है कि कच्चे तेल की महंगी कीमतों का असर कंपनियों के मार्जिन पर पड़ेगा।
किन सेक्टरों पर रहेगी नजर?
क्रूड ऑइल के दाम बढ़ने से सबसे ज्यादा दबाव इन सेक्टरों पर देखने को मिल सकता है:
- पेंट (Paints) और टायर (Tyres): इनपुट कॉस्ट बढ़ने से मुनाफे पर असर पड़ सकता है।
- एविएशन (Aviation): फ्यूल की लागत बढ़ने से विमानन कंपनियों का खर्च बढ़ेगा।
- OMCs (ऑयल मार्केटिंग कंपनियां): इंटरनेशनल कीमतों और सरकारी फ्यूल प्राइसिंग पॉलिसी के बीच इनका बैलेंस बिगड़ना तय है।
फिलहाल, जॉर्डन में U.S. एसेट्स पर हमले और कुवैत-बहरीन के पास शिपिंग रूट्स पर मंडराते खतरे स्थिति को और भी नाजुक बना रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या यह तनाव आगे और बढ़ेगा या बातचीत से हल निकलेगा।
