अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में शिपिंग ठप हो गई है। इसका सीधा असर ग्लोबल ऑयल कीमतों पर पड़ा है और Brent Crude उछलकर **$91** प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जिससे भारत के लिए इंपोर्ट कॉस्ट बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
दुनियाभर के एनर्जी मार्केट्स में इस वक्त भारी चिंता का माहौल है। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया सैन्य टकराव के बाद ग्लोबल ऑयल कीमतों में आग लग गई है। Brent Crude फ्यूचर्स अब $91.05 प्रति बैरल के स्तर पर ट्रेड कर रहा है, जबकि WTI क्रूड $86.50 के पार निकल गया है। तनाव की शुरुआत लराक द्वीप (Larak Island) पर अमेरिकी स्ट्राइक से हुई, जिसके जवाब में जॉर्डन और यूएई में ईरान समर्थित हमलों ने आग में घी डालने का काम किया है।
ग्लोबल शिपिंग पर संकट
दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऑयल ट्रांजिट रूट 'होर्मुज जलडमरूमध्य' इस समय भारी रुकावटों का सामना कर रहा है। डेटा के मुताबिक, यहां से गुजरने वाले जहाजों की संख्या घटकर मात्र 5 रह गई है। यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स (UK Maritime Trade Operations) की रिपोर्ट है कि क्षेत्र से गुजर रहे एक टैंकर पर भी हमला हुआ है। इस खतरे के कारण लॉजिस्टिक्स कंपनियों को या तो रूट बदलना पड़ रहा है या भारी-भरकम इंश्योरेंस प्रीमियम चुकाना पड़ रहा है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए यह भू-राजनीतिक तनाव सीधे तौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें न केवल आयात बिल को बढ़ाती हैं, बल्कि भारतीय रुपये (Rupee) पर भी दबाव डालती हैं और देश में महंगाई (Inflation) को बढ़ा सकती हैं।
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) जैसे Indian Oil, BPCL और HPCL के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है। अगर कंपनियां बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों पर नहीं डाल पाती हैं, तो उनके मार्जिन पर सीधा असर पड़ेगा। हालांकि, ऑयल एक्सप्लोरेशन कंपनियों की कमाई का समीकरण ग्लोबल प्राइसिंग और सरकारी लेवी (Levies) पर निर्भर करेगा।
फिलहाल मार्केट के जानकारों की नजर इस बात पर है कि क्या यह सिर्फ एक छोटी अवधि की उठापटक है या होर्मुज में सप्लाई चेन का संकट लंबे समय तक चलेगा, जो डीजल जैसे रिफाइंड प्रोडक्ट्स की किल्लत भी पैदा कर सकता है।
