Brent Crude ₹6,300 के पार! अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चा तेल हुआ महंगा

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AuthorAditya Rao|Published at:
Brent Crude ₹6,300 के पार! अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चा तेल हुआ महंगा

अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आज बड़ी उछाल देखने को मिली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) के दाम **2.4%** बढ़कर **$75.96** प्रति बैरल पर पहुंच गए। इस वजह से ग्लोबल सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका से निवेशकों में घबराहट है। हालांकि, अमेरिकी डॉलर (US Dollar) में आई मजबूती ने कीमतों को थोड़ा थामे रखा।

कच्चे तेल में तूफानी तेजी

बुधवार को वैश्विक तेल बाज़ारों में ज़बरदस्त तेज़ी देखी गई। अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के चलते ब्रेंट क्रूड फ्यूचर (Brent Crude Futures) 2.4% चढ़कर $75.96 प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 2.6% उछलकर इसी स्तर पर आ गया। तेल की कीमतों में यह तेज़ी ऐसे समय में आई है जब पिछले सत्र में ही मिडिल ईस्ट में अस्थिरता की चिंताओं के चलते कच्चे तेल में करीब 3% की रिकवरी आई थी।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर असर

बाज़ार की नज़रें अब होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर टिकी हैं, जो वैश्विक तेल निर्यात का एक अहम समुद्री रास्ता है। हालिया तेज़ी की शुरुआत तब हुई जब खबरें आईं कि अमेरिकी सेना ने इन जलमार्गों से गुज़र रहे तीन वाणिज्यिक जहाजों पर कथित ईरानी हमलों के जवाब में सैन्य कार्रवाई की है। इसी बीच, समुद्री सुरक्षा सूत्रों से यह भी पता चला है कि ओमान के तट पर एक सऊदी-ध्वजांकित सुपरटैंकर, वेडियन (Wedyan), को नुकसान पहुंचा है। इन घटनाओं से ऊर्जा निवेशकों के लिए तेल पर रिस्क प्रीमियम बढ़ गया है, क्योंकि इस क्षेत्र में किसी भी तरह की रुकावट वैश्विक बाज़ारों में कच्चे तेल के प्रवाह को सीमित कर सकती है।

रेगुलेटरी और करेंसी फैक्टर

सैन्य हमलों के अलावा, अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात पर फिर से प्रतिबंध लगाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। अमेरिकी अधिकारियों ने हाल की समुद्री घटनाओं को अस्वीकार्य करार दिया है, जिससे और अधिक भू-राजनीतिक उपायों की संभावना बढ़ गई है जो तेल की सप्लाई को प्रभावित कर सकते हैं। जहां ये कारक कीमतों को ऊपर ले जा रहे हैं, वहीं अमेरिकी डॉलर में आई मजबूती कीमतों में हो रही बढ़ोतरी को कुछ हद तक नियंत्रित कर रही है। डॉलर इंडेक्स 0.1% बढ़कर 101.16 पर पहुंच गया, जो आम तौर पर अन्य मुद्राओं का उपयोग करने वाले आयातकों के लिए तेल को अधिक महंगा बनाता है, जिससे मांग और कीमत में वृद्धि पर एक प्राकृतिक लगाम लग जाती है।

निवेशकों के लिए ज़रूरी बातें

आने वाले दिनों में सबसे महत्वपूर्ण बात यह देखनी होगी कि क्या समुद्री सुरक्षा जोखिमों से सप्लाई में लगातार व्यवधान होता है या क्या कूटनीतिक रास्ते स्थिति को शांत करने में सफल होते हैं। ऊर्जा और कमोडिटी से जुड़े क्षेत्रों के निवेशकों को इस बात पर भी नज़र रखनी चाहिए कि प्रमुख तेल उत्पादक देश ईरान पर प्रतिबंधों के सख्त होने पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी डॉलर की निरंतर मजबूती एक प्रमुख कारक बनी रहेगी, क्योंकि इसमें कोई भी और वृद्धि मध्य पूर्व के तनाव से वर्तमान में मिल रहे मूल्य समर्थन को बेअसर कर सकती है।

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