सऊदी अरब में हमलों के बाद ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) के दाम उछलकर **$111 प्रति बैरल** पर पहुंच गए हैं। सप्लाई चेन में बाधा के चलते भारत के इंपोर्ट बिल और रुपये पर दबाव बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है, जिसका असर एविएशन और पेंट जैसे सेक्टर के मुनाफे पर पड़ सकता है।
ग्लोबल ऑयल मार्केट में फिलहाल काफी उथल-पुथल मची है। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड $111 के स्तर को छू गया। सऊदी अरब में ताजा हमलों के कारण हालात गंभीर बने हुए हैं और अमेरिकी प्रशासन ने अपने दूतावास के कर्मचारियों को निकालने का फैसला लिया है। वेस्ट एशिया के अहम ऑयल ट्रांजिट रूट पर मंडराता खतरा एनर्जी कीमतों को लगातार ऊंचाई पर बनाए हुए है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंताएं
भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए ग्लोबल मार्केट में हलचल का सीधा असर भारत पर पड़ता है। तेल की कीमतें बढ़ने से देश का इंपोर्ट बिल बढ़ेगा, जिससे करंट अकाउंट डेफिसिट पर दबाव आएगा और रुपया कमजोर हो सकता है। रुपये की कमजोरी से देश में इंपोर्टेड इन्फ्लेशन (महंगाई) बढ़ती है, जिससे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के लिए इंटरेस्ट रेट मैनेज करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
सेक्टरवार असर
- OMCs: हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और इंडियन ऑयल (IOCL) जैसे ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर मार्जिन का दबाव रहेगा। यदि सरकार रिटेल फ्यूल प्राइसेज को ग्लोबल रेट्स के मुताबिक नहीं बढ़ाती है, तो इनके प्रॉफिट पर असर पड़ना तय है।
- Upstream कंपनियां: ONGC जैसी कंपनियों को प्रति बैरल तेल बेचने पर ज्यादा कमाई हो सकती है, लेकिन निवेशक इस बात पर नजर रख रहे हैं कि सरकार क्या इन पर 'विंडफॉल टैक्स' (Windfall Tax) का बोझ डालती है।
- अन्य सेक्टर: इंडिगो (InterGlobe Aviation) जैसी एयरलाइंस की ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ेगी क्योंकि एटीएफ (ATF) सीधे क्रूड से जुड़ा है। वहीं, पेंट और टायर कंपनियों के मार्जिन पर भी कच्चे माल की बढ़ती कीमतों का बुरा असर पड़ सकता है। निवेशकों के लिए अब कंपनियों का मार्जिन मैनेजमेंट और सरकार की सब्सिडी पॉलिसी पर नजर रखना सबसे जरूरी होगा।
