Brent Crude: मिडिल ईस्ट में तनाव से कच्चे तेल में उबाल, भाव **$110.10** के पार

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Brent Crude: मिडिल ईस्ट में तनाव से कच्चे तेल में उबाल, भाव **$110.10** के पार

सऊदी अरब के एनर्जी ठिकानों पर हुए हमलों के बाद ग्लोबल मार्केट में कच्चा तेल **$110.10** प्रति बैरल पर पहुंच गया है। इस तेजी से भारतीय एयरलाइंस, लॉजिस्टिक्स और पेंट कंपनियों पर लागत का भारी दबाव बढ़ सकता है।

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड के दाम $110.10 प्रति बैरल तक उछल गए हैं। बाजार की यह हलचल सऊदी अरब के यनबू और शैबाह ऑयलफील्ड जैसे प्रमुख एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए हमलों के बाद तेज हुई है। कच्चे तेल का दाम $100 के मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर बना रहना वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बना हुआ है।

भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर

भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है, जिससे ग्लोबल प्राइस का सीधा असर हमारे इंपोर्ट बिल पर पड़ता है। दाम बढ़ने से भारतीय रुपये (Rupee) पर दबाव बढ़ेगा और देश का ट्रेड डेफिसिट भी बिगड़ सकता है। निवेशकों की नजर इस बात पर है कि यह महंगाई आने वाले महीनों में देश की ग्रोथ को कैसे प्रभावित करेगी।

सेक्टरवार असर

कच्चे तेल की आग में कई सेक्टर झुलस सकते हैं। एयरलाइंस जैसे कि IndiGo पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा, क्योंकि एटीएफ (ATF) की बढ़ती कीमतें उनके ऑपरेशनल खर्च को बढ़ा देती हैं। इसके अलावा, पेंट और टायर बनाने वाली कंपनियों के लिए रॉ मटेरियल महंगा हो जाएगा। अगर ये कंपनियां दाम नहीं बढ़ा पाईं, तो इनके मुनाफे (Margin) पर चोट लगना तय है।

दूसरी तरफ, सरकारी ऑयल एक्सप्लोरेशन कंपनियों जैसे ONGC और Oil India के लिए यह फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि उन्हें कच्चे तेल की अधिक कीमत का सीधा लाभ मिलता है।

निवेशकों के लिए क्या है जरूरी?

बाजार फिलहाल सप्लाई चेन के जोखिम और ग्लोबल इन्वेंट्री के बीच संतुलन बना रहा है। आने वाले हफ्तों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सप्लाई चेन की ये दिक्कतें जारी रहती हैं या नहीं। साथ ही, सरकार घरेलू फ्यूल कंज्यूमर्स को राहत देने के लिए कोई नीतिगत कदम उठाती है या नहीं, यह भी देखने वाली बात होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.