US द्वारा ईरान के प्रस्ताव को ठुकराए जाने के बाद Brent Crude की कीमतें उछलकर $106.96 प्रति बैरल पर पहुंच गई हैं। यह तेजी भारतीय निवेशकों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इससे एविएशन, पेंट्स और सरकारी ऑयल कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।
मिडल ईस्ट में फिर से भड़की भू-राजनीतिक (Geopolitical) आग का असर ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर साफ दिखने लगा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के उस प्रस्ताव को खारिज किए जाने के बाद, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलने के बदले प्रतिबंध हटाने की मांग की गई थी, कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। Brent Crude का भाव सोमवार को $106.96 प्रति बैरल तक पहुंच गया।
भारतीय बाजार पर क्या हुआ असर?
ग्लोबल मार्केट की हलचल का सीधा असर डोमेस्टिक कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दिखा। अक्टूबर के लिए क्रूड ऑयल फ्यूचर्स 2.33% की तेजी के साथ ₹9,054 पर ट्रेड कर रहे हैं, जबकि नेचुरल गैस के भाव में 3.38% की गिरावट दर्ज की गई।
किन सेक्टर्स पर मंडराया संकट?
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत के लिए दोहरी मार साबित हो सकती हैं।
- OMCs (Oil Marketing Companies): Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum जैसी कंपनियों के मार्जिन पर सीधा दबाव आ सकता है। अगर ये कंपनियां पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाती हैं, तो इनका मुनाफा (Profit) कम होना तय है।
- डाउनस्ट्रीम सेक्टर: पेंट बनाने वाली कंपनियां, टायर मैन्युफैक्चरर्स और एविएशन सेक्टर (Aviation) के लिए कच्चे माल की लागत बढ़ जाएगी। बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों पर डालना इन कंपनियों के लिए आसान नहीं होगा, जिससे इनकी तिमाही कमाई पर असर पड़ सकता है।
इसके अलावा, तेल के ऊंचे दाम देश में महंगाई (Inflation) को भी हवा दे सकते हैं और भारतीय रुपये की वैल्यू पर भी दबाव बना सकते हैं। निवेशक फिलहाल इस बात पर नजर गड़ाए हुए हैं कि क्या यह तनाव जल्द सुलझेगा या फिर एनर्जी मार्केट में यह अस्थिरता लंबे समय तक बरकरार रहेगी।
