ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के जारी रहने की पुष्टि के बाद Brent Crude में **1.11%** की तेजी आई है और यह **$103.73** प्रति बैरल पर पहुंच गया है। तेल की कीमतों में यह उछाल भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सीधे तौर पर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के मार्जिन, महंगाई और रुपये की चाल को प्रभावित करता है।
ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध हटाने से इनकार करने के बाद ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों ने उड़ान भर ली है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि ईरान से सप्लाई में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। इस सप्लाई संकट के चलते Brent Crude 1.11% बढ़कर $103.73 प्रति बैरल पर सेटल हुआ, वहीं WTI क्रूड भी $89.72 के स्तर पर पहुंच गया।
भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए यह तेजी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा संकेत है।
भारतीय ऑयल कंपनियों पर असर
बढ़ती कीमतों का असर सेक्टर की अलग-अलग कंपनियों पर अलग तरह से पड़ता है:
- OMCs (Indian Oil, BPCL, HPCL): ये कंपनियां डॉलर में तेल खरीदती हैं और रुपये में पेट्रोल-डीजल बेचती हैं। अगर ग्लोबल कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो इनके नेट प्रॉफिट मार्जिन पर भारी दबाव आ सकता है।
- Upstream कंपनियां (ONGC, Oil India): ऊंची कीमतें इनके लिए फायदेमंद हो सकती हैं, क्योंकि इनका रेवेन्यू सीधे क्रूड प्राइस से जुड़ा होता है।
करेंसी और महंगाई का जोखिम
मौजूदा समय में डॉलर की मजबूती भी एक बड़ी चिंता है। डॉलर महंगा होने से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ जाता है, जिससे भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ता है और करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) का खतरा पैदा होता है। इसके अलावा, ईंधन की बढ़ती कीमतें ट्रांसपोर्टेशन और मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट को बढ़ाकर महंगाई (Inflation) को और हवा दे सकती हैं, जिससे RBI के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
निवेशकों को अब कंपनियों के मैनेजमेंट की कमेंट्री, सरकारी फैसलों और रुपये की चाल पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है।
