मंगलवार को कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में बड़ी गिरावट आई। Brent Crude **1.66%** गिरकर **$86.89** प्रति बैरल पर आ गया, वहीं WTI (West Texas Intermediate) भी **1.76%** घटकर **$81.16** पर पहुंच गया। अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक प्रगति (diplomatic progress) से सप्लाई में रुकावट के डर ने बाजार की घबराहट कम कर दी है।
Detailed Coverage
तेल की कीमतों में क्यों आई नरमी?
पिछले हफ्ते 8% की भारी गिरावट के बाद, तेल की कीमतों में आज नरमी देखी गई। इसका मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की खबरें हैं, जिससे मध्य पूर्व (Middle East) में तेल सप्लाई रुकने का डर कम हो गया है।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी नजर
इसके अलावा, कैस्पियन पाइपलाइन कंसोर्टियम (Caspian Pipeline Consortium) के ब्लैक सी टर्मिनल पर ऑपरेशन्स फिर से शुरू होने से भी बाजार को राहत मिली है। पिछले हफ्ते ड्रोन गतिविधि के कारण यहां लोडिंग रोक दी गई थी। हालांकि, सऊदी अरब के एनर्जी सेंटर्स के पास ड्रोन गतिविधि और हूथी विद्रोहियों (Houthi rebels) द्वारा किंगडम की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हमले के दावों जैसी खबरें बताती हैं कि भू-राजनीतिक जोखिम (geopolitical risks) अभी भी बने हुए हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का महत्व
निवेशकों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर पैनी नजर रखना जरूरी है। Barclays के आंकड़ों के अनुसार, इस रूट से एक्सपोर्ट में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है। 24 जुलाई को खत्म हुए हफ्ते में यहां से एक्सपोर्ट घटकर 2.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया, जो पिछले हफ्ते 5.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन था। इस क्षेत्र में कोई भी रुकावट वैश्विक तेल की उपलब्धता और कीमतों को तुरंत प्रभावित कर सकती है।
इसके अलावा, अमेरिकी कच्चे तेल के इन्वेंटरी (US crude oil inventories) के आंकड़े भी अहम होंगे। उम्मीद है कि इन्वेंटरी में कमी दिखेगी, लेकिन डिस्टिलेट स्टॉकपाइल्स (distillate stockpiles) में बढ़ोतरी मांग के बदलते पैटर्न का संकेत दे सकती है। इन सब बातों पर कूटनीतिक नतीजों के साथ मिलकर तेल की कीमतों का भविष्य तय होगा।
