वेस्ट एशिया में जारी तनाव के कारण Brent Crude के दाम **$108** प्रति बैरल के करीब पहुंच गए हैं। जानकारों का कहना है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो कीमतें **$120** का स्तर छू सकती हैं, जो भारत के ट्रेड डेफिसिट और महंगाई के लिए बड़ा जोखिम है।
ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त हलचल है। Brent Crude $105 से $108 प्रति बैरल के रेंज में ट्रेड कर रहा है। इस तेजी की मुख्य वजह वेस्ट एशिया में चल रहा भू-राजनीतिक अस्थिरता का माहौल है, जिसने 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' जैसे अहम शिपिंग रूट्स को बुरी तरह प्रभावित किया है। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि अगर ये सुरक्षा चुनौतियां 2027 तक बनी रहीं, तो कीमतें $120 के मार्क तक जा सकती हैं।\n\nचीन से कमजोर डिमांड के बावजूद सप्लाई में कमी के कारण बाजार में दबाव बना हुआ है। भारत के नजरिए से देखें, तो कच्चा तेल महंगा होने का मतलब है आयात बिल (Import Bill) में भारी बढ़ोतरी। इससे देश का ट्रेड डेफिसिट बढ़ता है और महंगाई का खतरा भी बना रहता है, जिसका सीधा असर RBI की ब्याज दरों पर पड़ सकता है।\n\nइसका असर भारतीय कंपनियों पर अलग-अलग दिखता है। ONGC और Oil India जैसी अपस्ट्रीम कंपनियों को तो शायद तेल की ऊंची कीमतों से फायदा हो, लेकिन यह सरकार की 'विंडफॉल टैक्स' पॉलिसी पर निर्भर करेगा। वहीं, दूसरी तरफ IOC, BPCL और HPCL जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के लिए चुनौतियां बढ़ गई हैं। अगर कंपनियां बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों पर नहीं डाल पाईं, तो उनके रिफाइनिंग और मार्केटिंग मार्जिन पर दबाव साफ दिखेगा। निवेशकों को अब इन कंपनियों के तिमाही नतीजों पर नजर रखनी होगी कि वे इस बढ़े हुए इनपुट कॉस्ट को कैसे मैनेज कर रहे हैं।
