ब्राजील में लूला डी सिल्वा की जीत के बाद वहां की करेंसी 'रीयल' में **12%** तक की भारी गिरावट आई है। इसका सीधा असर ग्लोबल कमोडिटी बाजार पर पड़ा है, जहां चीनी, कॉफी और सोयाबीन के दाम तेजी से गिरे हैं। भारतीय निवेशकों के लिए यह खबर इसलिए अहम है क्योंकि इससे देश में इम्पोर्ट कॉस्ट और महंगाई के ट्रेंड्स पर बड़ा असर पड़ सकता है।
बाजार में क्यों मचा है हड़कंप?
ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों ने वैश्विक वित्तीय और कमोडिटी बाजारों में बड़ी हलचल पैदा कर दी है। लुईज़ इनासियो लूला डी सिल्वा की जीत के बाद, ब्राजीलियाई रीयल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 8% से 12% तक टूट गया है। करेंसी में आई इस बड़ी गिरावट के कारण अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी फ्यूचर्स में बिकवाली का माहौल बन गया है।
कमोडिटी कीमतों पर असर
ब्राजील दुनिया भर में चीनी, अरेबिका कॉफी और सोयाबीन का एक प्रमुख निर्यातक है। स्थानीय करेंसी के कमजोर होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन उत्पादों की कीमत गिर जाती है। यही कारण है कि न्यूयॉर्क जैसे ट्रेडिंग हब में इनकी कीमतों पर दबाव बढ़ गया है। स्थिति इतनी गंभीर थी कि स्थानीय Bovespa स्टॉक इंडेक्स में 14% की गिरावट के बाद ट्रेडिंग को रोकने के लिए सर्किट ब्रेकर का सहारा लेना पड़ा।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?
भारत एडिबल ऑइल्स और विशेष रूप से सोयाबीन ऑयल का बड़ा आयातक है। ग्लोबल मार्केट में सोयाबीन और चीनी की कीमतें घटने से भारतीय FMCG कंपनियों को बड़ी राहत मिल सकती है, जो पिछले कुछ समय से मार्जिन के दबाव से जूझ रही थीं। यदि यह गिरावट जारी रहती है, तो भारतीय कंपनियों का रॉ मटेरियल कॉस्ट कम हो सकता है, जिससे उनके मुनाफे में सुधार की उम्मीद है।
जोखिम और भविष्य की राह
बाजार की यह घबराहट नई सरकार की राजकोषीय नीति (Fiscal Policy) को लेकर निवेशकों की चिंता का नतीजा है। बाजारों को डर है कि सरकारी खर्च बढ़ने से फिस्कल डेफिसिट बढ़ सकता है, जिसके कारण ब्राजील से विदेशी पूंजी तेजी से बाहर निकल रही है। फिलहाल निवेशकों की नजर ब्राजील की नई सरकार द्वारा राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Discipline) बनाए रखने के संकेतों पर टिकी है।
