ब्लैक सी क्षेत्र में चल रहे विवादों के कारण रूस और यूक्रेन से सूरजमुखी तेल (Sunflower Oil) की सप्लाई में आई बाधाओं से निपटने के लिए भारत अब अपना रुख दक्षिण अमेरिका की ओर कर रहा है। देश पाम तेल (Palm Oil) और सोया तेल (Soy Oil) का आयात भी बढ़ा रहा है। कमजोर मॉनसून के कारण घरेलू स्तर पर भी तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, जिससे आने वाले त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ पड़ सकता है।
सप्लाई पर गहराया संकट, बदली भारत की रणनीति
रूस और यूक्रेन, जो दुनिया में सूरजमुखी तेल के बड़े सप्लायर हैं, में चल रहे संघर्षों के कारण भारत की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। भारत, जो दुनिया का सबसे बड़ा वनस्पति तेल खरीदार है, सालाना लगभग 10 लाख टन सूरजमुखी तेल इसी क्षेत्र से मंगाता है। लेकिन, शिपिंग मार्गों पर सुरक्षा चिंताएं और लॉजिस्टिक्स पर हमले बढ़ने से डिलीवरी में 60 दिनों तक की देरी हो रही है। इस वजह से भारतीय ट्रेडर्स को अब दूसरे देशों से और दूसरे तरह के तेलों की तलाश करनी पड़ रही है।
अर्जेंटीना और अन्य तेलों की बढ़ी मांग
आपूर्ति के जोखिमों को कम करने के लिए, भारतीय इंपोर्टर्स अब अर्जेंटीना से सूरजमुखी तेल की खरीद बढ़ा रहे हैं। इसके साथ ही, कंपनियां अपने स्टॉक को बनाए रखने के लिए पाम तेल और सोया तेल जैसे अन्य वनस्पति तेलों के आयात पर भी जोर दे रही हैं। रिपोर्टों के अनुसार, जुलाई में पाम तेल का आयात बढ़कर लगभग 7 लाख टन और सोया तेल का आयात 5 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है। यह बदलाव न केवल भौगोलिक है, बल्कि उत्पादों के आधार पर भी है, क्योंकि कंपनियां इन विभिन्न तेलों की लागत के अंतर को भी मैनेज कर रही हैं।
घरेलू और वैश्विक दबाव का दोहरा असर
खाद्य तेल क्षेत्र पर दबाव सिर्फ अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति की वजह से ही नहीं है, बल्कि भारत में कमजोर मॉनसून का भी असर दिख रहा है। इसके कारण स्थानीय तिलहन की बुवाई और उत्पादन प्रभावित हुआ है, जिससे देश को अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर अधिक निर्भर रहना पड़ रहा है। साथ ही, अल नीनो (El Niño) जैसे पर्यावरणीय कारक और इंडोनेशिया व मलेशिया जैसे देशों में बायोफ्यूल की बढ़ती मांग के कारण वैश्विक वनस्पति तेल बाजार में भी टाइटनेस देखी जा रही है। इन सभी वैश्विक और घरेलू दबावों के चलते इस महीने भारत में सूरजमुखी तेल की खुदरा कीमत में पहले ही 6% का इजाफा हो चुका है।
निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बातें
निवेशकों को घरेलू खाद्य तेल प्रोसेसरों और वितरकों पर पड़ने वाले मार्जिन के असर पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। जब सूरजमुखी तेल की कच्ची लागत बढ़ती है, तो अगर कंपनियां इन बढ़ी हुई लागतों का पूरा बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाल पातीं, तो उनके मुनाफे पर दबाव आ सकता है, खासकर त्योहारी सीजन के दौरान। इसके अलावा, पाम और सोया तेल के बढ़ते आयात से उन कंपनियों के प्रोडक्ट मिक्स और प्रॉफिटेबिलिटी प्रोफाइल में भी बदलाव आ सकता है, जो पारंपरिक रूप से सूरजमुखी तेल पर ध्यान केंद्रित करती रही हैं। भविष्य में, ब्लैक सी शिपिंग में देरी की अवधि, वैकल्पिक तेलों की कीमत की प्रवृत्ति, और भारतीय खुदरा बाजार की प्रतिस्पर्धी स्थिति में कंपनियां लागत को कितनी प्रभावी ढंग से मैनेज कर पाती हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
