त्योहारी सीजन में मांग और खराब मौसम के कारण घरेलू सप्लाई में आई भारी कमी। भाव **₹704 से ₹724 प्रति किलो** तक पहुंच गए हैं। बढ़ती कमी को पूरा करने के लिए अब भारत श्रीलंका से आयात बढ़ा रहा है।
भारतीय बाजार में काली मिर्च की कीमतें लगातार मजबूती दिखा रही हैं। अनगार्बल्ड वैरायटी लगभग ₹704 और गार्बल्ड काली मिर्च ₹724 प्रति किलो के आसपास कारोबार कर रही है। त्योहारों की बढ़ती मांग और घरेलू सप्लाई की भारी किल्लत के चलते व्यापारियों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों का रुख करना पड़ रहा है।
खराब मौसम से घरेलू उत्पादन पर मार
सप्लाई चेन में यह संकट मुख्य रूप से खराब मौसम की देन है। कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल के इडुक्की जैसे प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में अनियमित बारिश ने फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है। 2026 के हार्वेस्ट सीजन के लिए अनुमानों के मुकाबले पैदावार कम रहने की आशंका है। इंडस्ट्री का अनुमान था कि पैदावार 65,000 से 75,000 टन के बीच रहेगी, लेकिन अल-नीनो जैसे मौसमी कारकों ने इस लक्ष्य को मुश्किल बना दिया है।
आयात पर बढ़ती निर्भरता
घरेलू कमी को पूरा करने के लिए भारतीय खरीदार अब श्रीलंका से बड़ी मात्रा में माल मंगा रहे हैं। कीमत में अंतर एक बड़ा कारण है—श्रीलंकाई काली मिर्च करीब $6,900 प्रति टन पर उपलब्ध है, जबकि भारतीय काली मिर्च का भाव $7,800 प्रति टन के करीब चल रहा है। वियतनाम ($6,000) और ब्राजील ($5,800) भी बाजार में अन्य प्रमुख स्रोत बने हुए हैं, हालांकि करेंसी में उतार-चढ़ाव लागत बढ़ा रहे हैं।
किसानों का बदलता ट्रेंड
निवेशकों के लिए एक चिंता का विषय यह भी है कि इडुक्की जैसे क्षेत्रों में किसान अब काली मिर्च की जगह इलायची की खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं। ग्वाटेमाला में उत्पादन कम होने के कारण इलायची के दाम मजबूत हुए हैं, जिससे किसान उस तरफ शिफ्ट हो रहे हैं। यदि यह बदलाव जारी रहा, तो भविष्य में भारत की काली मिर्च उत्पादन क्षमता पर संरचनात्मक (Structural) जोखिम बढ़ सकता है, जिससे लंबी अवधि तक आयात पर निर्भरता बनी रह सकती है। मसाला कंपनियों के लिए रॉ मटेरियल की यह बढ़ती लागत सीधे तौर पर प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाल सकती है।
