Q4 FY26 के नतीजों के मुताबिक, Bharat Coking Coal (BCCL) का नेट प्रॉफिट पिछले साल की समान अवधि के ₹66.5 करोड़ से घटकर ₹27.3 करोड़ रह गया। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि कंपनी का EBITDA ₹61.9 करोड़ के प्रॉफिट से फिसलकर ₹335 करोड़ के नुकसान में आ गया। इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू भी 15% घटकर ₹3,283 करोड़ पर आ गया। कंपनी के प्रोडक्शन में भी गिरावट दर्ज की गई, जो FY26 में 35.52 मिलियन टन रहा, जबकि पिछले साल यह 40.50 मिलियन टन था।
इस गिरावट की मुख्य वजह कंपनी के ऑपरेशनल खर्चों में हुई भारी बढ़ोतरी बताई जा रही है। खासकर, झारखंड सरकार द्वारा कोयला डिस्पैच पर लगाए जाने वाले मिनरल सेस (cess) में मार्च 2025 में की गई बढ़ोतरी। यह सेस ₹100 प्रति मीट्रिक टन से बढ़कर ₹250 प्रति मीट्रिक टन कर दिया गया, जिसका सीधा असर माइनिंग कंपनियों के मार्जिन पर पड़ा है।
इन सबके बावजूद, कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मनोज कुमार अग्रवाल ने FY27 के लिए उम्मीद जताई है। उनका अनुमान है कि स्टील सेक्टर में लगातार बनी रहने वाली डिमांड के चलते रियलाइजेशन और वॉल्यूम में 10-15% की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। BCCL का इस फाइनेंशियल ईयर में 39 मिलियन टन कोयला प्रोडक्शन का लक्ष्य है।
हालांकि, बाजार की नजरों में BCCL की स्थिति थोड़ी अलग है। बड़ी पीयर कंपनी Coal India ने Q4 FY26 में 11.1% की ग्रोथ के साथ ₹10,839 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया है, और उसका P/E रेशियो करीब 9.34x है। वहीं, BCCL का P/E रेशियो 120.36x है, जो काफी ज्यादा है। BCCL का मार्केट कैप लगभग ₹15,656 करोड़ है, जबकि Coal India का मार्केट कैप करीब ₹2,90,264 करोड़ है।
विश्लेषकों का मानना है कि BCCL के लिए आगे की राह आसान नहीं होगी। MarketsMojo ने 23 अप्रैल 2026 को ही 'Sell' रेटिंग दी थी, जिसमें कंपनी के हाई वैल्यूएशन और निगेटिव फाइनेंशियल ट्रेंड्स का जिक्र था। पिछले पांच सालों में BCCL की नेट सेल्स में कोई एनुअल ग्रोथ नहीं दिखी है, जो उसके हाई P/E रेशियो के विपरीत है। इसके अलावा, झारखंड में बढ़ा हुआ सेस जैसी राज्य-विशिष्ट लागतें सीधे प्रॉफिटेबिलिटी को प्रभावित कर रही हैं। कंपनी के ऑफटेक वॉल्यूम में भी गिरावट आई है, जो FY26 में 33.05 मिलियन टन रहा, जबकि FY25 में यह 38.3 मिलियन टन था।
मैनेजमेंट की FY27 के लिए 10-15% वॉल्यूम और रियलाइजेशन ग्रोथ की भविष्यवाणी, और देश में स्टील व पावर की मजबूत मांग, रिकवरी की उम्मीद जगाती है। लेकिन BCCL को झारखंड में उच्च राज्य लेवी के प्रभाव को प्रभावी ढंग से मैनेज करना होगा और बढ़ती लागतों से निपटने के लिए ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ानी होगी।
