बांग्लादेश ने भारतीय हिलसा मछली के आयात पर कड़ा रुख अपनाते हुए 103 परमिट रद्द कर दिए हैं। आरोप है कि गुजरात की सस्ती मछली को 'पद्मा' हिलसा बताकर बेचा जा रहा था, जिससे दुर्गा पूजा के सीजन में ट्रेड पर संकट गहरा गया है।
नियम और सख्ती की वजह
बांग्लादेश के मत्स्य विभाग (Department of Fisheries) ने एक कड़ा कदम उठाते हुए स्थानीय आयातकों को जारी किए गए 103 'नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। इस फैसले के बाद भारत से बांग्लादेश होने वाली हिलसा की लीगल सप्लाई पूरी तरह रुक गई है। विवाद की जड़ गुजरात की नर्मदा नदी से आने वाली हिलसा है, जिसे कथित तौर पर प्रीमियम 'पद्मा' हिलसा के नाम से गलत लेबल लगाकर बेचा जा रहा था। उपभोक्ताओं और अधिकारियों का मानना है कि गुजरात वाली मछली की क्वालिटी और टेक्सचर पद्मा की मशहूर हिलसा से बिल्कुल अलग है।
कारोबारियों पर मार
इस रेगुलेटरी कार्रवाई का सीधा असर बॉर्डर के दोनों तरफ बैठे व्यापारियों पर पड़ा है। बांग्लादेशी आयातकों के पास बड़ी मात्रा में स्टॉक फंसा हुआ है, जिसे वे क्लियर नहीं कर पा रहे हैं। इस वजह से उन्हें न केवल भारी फाइनेंशियल नुकसान हो रहा है, बल्कि ऑपरेशनल लागत भी बढ़ गई है। मजबूरी में कई व्यापारी अब स्टॉक को वापस लौटा रहे हैं या सस्ते दामों पर बेचने को मजबूर हैं।
दुर्गा पूजा और एक्सपोर्ट का भविष्य
यह ट्रेड बैरियर ऐसे समय में लगा है जब दुर्गा पूजा का त्यौहार नजदीक है। अमूमन इस दौरान बांग्लादेश से भारत में पद्मा हिलसा का एक्सपोर्ट काफी बढ़ जाता है। लेकिन मौजूदा विवाद और साफ पॉलिसी न होने के कारण अब इस बात पर सस्पेंस बना हुआ है कि क्या इस साल यह एक्सपोर्ट सीजन सामान्य तरीके से हो पाएगा या नहीं। व्यापारियों के लिए त्यौहार का सीजन कमाई का सबसे बड़ा जरिया होता है, और इस अनिश्चितता ने मार्जिन को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
अब बाजार की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या बांग्लादेश का मत्स्य विभाग लेबलिंग मानकों पर कोई नई गाइडलाइन जारी करेगा या इन परमिट्स को दोबारा बहाल किया जाएगा। तब तक बाजार में भारतीय हिलसा की सप्लाई बाधित रहने की पूरी संभावना है।
