Bureau of Indian Standards (BIS) ने सोने की हॉलमार्किंग फीस में **66%** का इजाफा किया है। अब यह शुल्क **₹45** से बढ़कर **₹75** प्रति आर्टिकल हो गया है। ज्वेलरी इंडस्ट्री का कहना है कि इससे उन पर **₹480 करोड़** का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और छोटे शहरों में फ्रॉड का खतरा बढ़ सकता है।
भारी फीस बढ़ोतरी से कारोबारियों में रोष
Bureau of Indian Standards (BIS) के इस फैसले के बाद से देशभर के ज्वेलर्स नाराज हैं। All-India Gem and Jewellery Domestic Council (GJC) ने कंज्यूमर अफेयर्स मिनिस्टर प्रल्हाद जोशी से इस फैसले को वापस लेने की मांग की है। इंडस्ट्री का मानना है कि फीस में 66.67% की यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर उनके मुनाफे को प्रभावित करेगी।
कारोबार पर क्या होगा असर?
इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक, इस फैसले से सीधे तौर पर ₹400 करोड़ का अतिरिक्त खर्च आएगा, जबकि ₹80 करोड़ का बोझ GST के रूप में बढ़ेगा। दिक्कत सिर्फ पैसों की नहीं है, बल्कि ऑपरेशनल देरी की भी है। पहले हॉलमार्किंग में 6 घंटे का समय लगता था, जो अब बढ़कर 36 घंटे तक पहुंच गया है। इससे ज्वेलर्स की वर्किंग कैपिटल लंबे समय के लिए ब्लॉक हो रही है।
फ्रॉड का बढ़ता खतरा
सबसे बड़ी चिंता टियर-2 और टियर-4 शहरों को लेकर है। जानकारों का कहना है कि जहां ग्राहकों में 'BIS Care' ऐप के प्रति जागरूकता कम है, वहां फर्जी Hallmark Unique Identification (HUID) का इस्तेमाल बढ़ सकता है। ज्यादा फीस के डर से कई लोग नियमों को दरकिनार करने की कोशिश करेंगे, जिससे ग्राहकों का भरोसा डगमगा सकता है।
फोटोग्राफी की अनिवार्यता पर सवाल
GJC ने हॉलमार्किंग के दौरान गहनों की अनिवार्य फोटोग्राफी के नियम पर भी सवाल उठाए हैं। ट्रेड बॉडी का तर्क है कि इससे सिक्योरिटी नहीं बढ़ती, क्योंकि इन फोटो को फ्रॉड करने वाले आसानी से कॉपी या मॉर्फ कर सकते हैं। फिलहाल देश में 1,577 हॉलमार्किंग सेंटर हैं, लेकिन इंडस्ट्री का कहना है कि फीस बढ़ने के बावजूद इंफ्रास्ट्रक्चर में कोई सुधार नहीं दिख रहा है।
