सोने की ऊंची कीमतों के बीच चांदी की बढ़ती मांग को देखते हुए, भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) अपनी टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर रहा है। हॉलमार्किंग वॉल्यूम में **5.9 मिलियन** आर्टिकल्स तक की उछाल आई है, और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका मकसद सोने की तरह ही चांदी के बाजार में भी ग्राहकों का भरोसा बढ़ाना है।
चांदी की मांग में क्यों आई तेजी?
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) चांदी की हॉलमार्किंग के लिए अपनी प्रयोगशालाओं (Laboratories) की क्षमता में ज़बरदस्त इज़ाफ़ा कर रहा है। दरअसल, सोने की कीमतें आसमान छूने के कारण कई खरीदार अब चांदी के गहने और अन्य सामानों की ओर रुख कर रहे हैं। इसी बदलते ट्रेंड को देखते हुए BIS ने अगले दो सालों में इस बढ़ती मांग को संभालने की योजना बनाई है। इसके लिए देशभर में रेफरल और अयस्क (Assay) प्रयोगशालाओं का विस्तार किया जा रहा है।
आंकड़े क्या कहते हैं?
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2025-26 के फाइनेंशियल ईयर में चांदी के आर्टिकल्स की हॉलमार्किंग 5.9 मिलियन तक पहुंच गई, जो पिछले साल के 3.2 मिलियन के मुकाबले एक बड़ी छलांग है। इस मांग को पूरा करने के लिए BIS के पास वर्तमान में चांदी के लिए लगभग 230 मान्यता प्राप्त अयस्क और हॉलमार्किंग केंद्र (Assaying and Hallmarking Centres) हैं। नियामक (Regulator) इस बाजार को व्यवस्थित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, ताकि टेस्टिंग की गुणवत्ता से समझौता किए बिना ज्यादा वॉल्यूम को संभाला जा सके।
नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल
बढ़ती मांग और सटीकता को बनाए रखने के लिए, BIS आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक्स जैसी उन्नत तकनीकों का भी परीक्षण कर रहा है। एजेंसी प्रयोगशाला कार्यों के लिए रोबोटिक आर्म्स का परीक्षण कर रही है और डेटा को स्वचालित रूप से कैप्चर करने के लिए टेस्ट इक्विपमेंट को सीधे अपने लैब इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम (LIMS) से जोड़ा है। इन कदमों, साथ ही CCTV निगरानी से, चांदी की शुद्धता प्रमाणित करने में लगने वाला समय कम होगा और पूरी प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी बनेगी।
HUID नंबर से बढ़ेगा भरोसा
बाजार में भरोसा बढ़ाने के लिए, सितंबर 2025 से चांदी के आर्टिकल्स के लिए हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन (HUID) नंबर भी शुरू किया गया है। इससे ग्राहक सोने की तरह ही अपनी चांदी की खरीद की गुणवत्ता को सत्यापित कर सकते हैं। हालांकि, फिलहाल चांदी की हॉलमार्किंग ऐच्छिक (Voluntary) है, लेकिन इन उपायों से ज्वैलरी सेक्टर में मानकीकरण (Standardisation) को बढ़ावा देने के BIS के प्रयासों का पता चलता है।
क्या हैं चुनौतियां?
इस विस्तार में कुछ ऑपरेशनल चुनौतियां भी हैं। कई मौजूदा टेस्टिंग सेंटर मूल रूप से सोने के लिए डिज़ाइन किए गए थे और चांदी के आर्टिकल्स की अधिक मात्रा को संभालने में बाधाओं का सामना कर रहे हैं। इसके अलावा, यह सिस्टम सरकारी और निजी मान्यता प्राप्त लैब्स के मिश्रण पर निर्भर करता है, जिससे भरोसे को बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की आवश्यकता होती है। इस क्षेत्र में काम करने वाले व्यवसायों को भी नियमों का पालन सुनिश्चित करना होगा, क्योंकि परीक्षण मानकों को पूरा न करने वाले उत्पादों पर नियामक कार्रवाई या बाजार से हटाए जाने का खतरा हो सकता है।
आगे क्या?
निवेशक और बाजार के जानकार बारीकी से नजर रखेंगे कि BIS आने वाले महीनों में इन टेस्टिंग सेंटरों का विस्तार कितनी प्रभावी ढंग से कर पाता है। अगला महत्वपूर्ण अपडेट इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार की प्रगति और क्या नियामक चांदी के लिए हॉलमार्किंग को अनिवार्य बनाने की दिशा में कोई और कदम उठाता है, इस पर होगा। यह खुदरा ज्वैलरी अनुपालन और उपभोक्ता विश्वास पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालेगा।
