नई दिल्ली में 23 अक्टूबर से शुरू होने जा रहे 'भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस' (BIRC) में भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए बड़े मौके हैं। 150 देशों के 4,649 खरीदार इस समिट में शामिल हो रहे हैं, जो पिछले साल के **₹33,453 करोड़** के बिजनेस कमिटमेंट को और आगे ले जाने का लक्ष्य है।
ग्लोबल मार्केट में भारत की धमक
नई दिल्ली के भारत मंडपम में 23 से 25 अक्टूबर 2026 तक होने वाली यह कॉन्फ्रेंस राइस ट्रेड के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। इसमें देश भर की 180 कंपनियां हिस्सा ले रही हैं। समिट के दौरान 2,000 से ज्यादा बिजनेस मीटिंग्स होंगी, जो एक्सपोर्ट ऑर्डर्स हासिल करने के लिए एक सीधा प्लेटफॉर्म देंगी।
बिजनेस स्ट्रैटेजी में बदलाव
पिछले साल 8.63 मिलियन टन चावल के लिए ₹33,453 करोड़ के सौदे हुए थे। इस बार कंपनियों का फोकस केवल रॉ राइस एक्सपोर्ट के बजाय 'वैल्यू-एडेड' प्रोडक्ट्स पर है। प्रोसेस्ड राइस में मार्जिन ज्यादा होता है, जो एक्सपोर्टर्स के मुनाफे के लिए एक नई दिशा तय करेगा।
चुनौतियां और रिस्क फैक्टर
एक्सपोर्ट सेक्टर के सामने सबसे बड़ा रिस्क डोमेस्टिक पॉलिसी है। महंगाई को काबू में रखने के लिए सरकार अक्सर 'मिनिमम एक्सपोर्ट प्राइस' और ड्यूटीज में बदलाव करती है, जिसका सीधा असर स्टॉक पर पड़ता है। S&P Global, BigMint और EY जैसे एक्सपर्ट्स इस इवेंट में यह देखेंगे कि कैसे ग्लोबल डिमांड, शिपिंग कॉस्ट और सरकारी नियमों का तालमेल बैठता है।
निवेशकों के लिए अहम इशारा
वियतनाम और थाईलैंड जैसे देशों से मिल रही कड़ी टक्कर के बीच, भारतीय एक्सपोर्टर्स मार्जिन कैसे मेंटेन करते हैं, यह देखना होगा। समिट में 'टॉप 10 ग्लोबल मार्केट्स' की एक गाइड भी जारी होगी, जो ट्रेडर्स को स्थिरता वाले क्षेत्रों की पहचान करने में मदद करेगी। भविष्य में सरकार की एक्सपोर्ट पॉलिसी में कोई भी बदलाव राइस स्टॉक्स में बड़ी हलचल पैदा कर सकता है, इसलिए निवेशकों को इस पर नजर बनाए रखनी चाहिए।
