सोने की कीमतों में क्यों आ सकती है तेजी?
Axis Direct के मुताबिक, सोने की कीमतों में तेजी के पीछे कई मुख्य कारण हैं। सेंट्रल बैंकों द्वारा लगातार सोने की खरीद, गोल्ड ETF में बढ़ता निवेश (खासकर भारत में), और वैश्विक अर्थव्यवस्था की अनिश्चितताएं सोने को एक सुरक्षित निवेश का विकल्प बनाती हैं। ब्रोकरेज का मानना है कि 2026 तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में Gold की कीमत $5,300-$5,500 प्रति औंस तक जा सकती है, जबकि भारतीय बाजार में यह ₹1,70,000-₹1,85,000 प्रति 10 ग्राम के स्तर को छू सकती है। यह मौजूदा कीमतों से लगभग 10-15% की बढ़ोतरी होगी।
ऐतिहासिक प्रदर्शन और अन्य कीमती धातुएं
पिछले 10 सालों (2016-2026) में सोने ने औसतन 18% का सालाना कंपाउंडेड रिटर्न दिया है, जो इसकी लगातार बढ़ती वैल्यू को दर्शाता है। हालांकि, यह औसत बड़े उतार-चढ़ाव को भी छुपाता है। वर्तमान में, Comex पर गोल्ड लगभग $4,800 प्रति औंस और MCX पर ₹1,52,000 प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है। लेकिन, दूसरी कीमती धातुओं जैसे Silver ने पिछले साल Gold जैसा प्रदर्शन नहीं किया है, और Platinum की रफ्तार और भी धीमी है। यह दर्शाता है कि डिमांड चुनिंदा धातुओं में ही दिख रही है, न कि पूरी कमोडिटी मार्केट में।
मैक्रोइकॉनॉमिक स्थितियां और डिमांड का गणित
Axis Direct के अनुसार, भले ही वैश्विक अर्थव्यवस्था में महंगाई बढ़े (stagflation) या फिर ब्याज दरें घटें, दोनों ही सूरतों में Gold को फायदा होने की उम्मीद है। महंगाई के दौर में Gold एक हेजिंग टूल के तौर पर काम करता है, वहीं ब्याज दरें घटने पर इसका आकर्षण बढ़ता है क्योंकि अवसर लागत (opportunity cost) कम हो जाती है और डॉलर कमजोर होता है। इसके अलावा, सेंट्रल बैंक लगातार सोने की खरीद जारी रखे हुए हैं, जो बेसलाइन डिमांड को बनाए रखता है। भारत में गोल्ड ETF में निवेश 2022 में ₹1,500 करोड़ से बढ़कर 2025 में ₹25,000-₹30,000 करोड़ तक पहुंच गया है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव भी सोने की सेफ-हेवन अपील को बढ़ाते हैं।
जोखिम और चुनौतियां: क्या है चिंता की बात?
Axis Direct के इस उम्मीद भरे अनुमान के बावजूद, कुछ बातों पर ध्यान देना जरूरी है। यह 10-15% की तेजी की भविष्यवाणी कुछ खास मैक्रोइकॉनॉमिक ट्रेंड्स और लगातार डिमांड पर निर्भर करती है। अगर U.S. Federal Reserve जैसी बड़ी सेंट्रल बैंकें महंगाई से लड़ने के लिए उम्मीद से ज्यादा सख्त मॉनेटरी पॉलिसी अपनाती हैं, तो सोने की कीमतों पर भारी दबाव आ सकता है। ऐतिहासिक रूप से, बढ़ती ब्याज दरों का सोने की कीमतों पर विपरीत असर देखा गया है। ETF इनफ्लो में अचानक बड़ी गिरावट भी कीमतों को नीचे ला सकती है। 2026 की पहली तिमाही में जनवरी के हाई से आई बड़ी गिरावट इस बात का प्रमाण है कि Gold कितना वोलेटाइल (अस्थिर) हो सकता है। अन्य कीमती धातुओं का कमजोर प्रदर्शन यह भी संकेत देता है कि मौजूदा डिमांड शायद व्यापक नहीं है।
विशेषज्ञों की राय और आगे का अनुमान
Axis Direct का अनुमान है कि 2026 के अंत तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में Gold $5,300-$5,500 प्रति औंस और घरेलू बाजार में ₹1,70,000-₹1,85,000 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है। लेकिन, बाजार के अन्य विशेषज्ञ ऊंची ब्याज दरों और संभावित डिफ्लेशनरी दबावों को लेकर सतर्कता बरत रहे हैं।
