Augmont Enterprises ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के साथ हाथ मिलाया है। इस पार्टनरशिप का मकसद इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (Electronic Gold Receipts) को बढ़ावा देना है, जिससे फिजिकल गोल्ड को एक रेगुलेटेड एक्सचेंज-ट्रेडेड सिस्टम में लाया जा सके। यह पहल सरकार के एक फैसले पर टिकी है, जो सोने के कन्वर्जन पर GST कलेक्शन से जुड़ा है। अगर यह सफल होता है, तो लाखों लोग डिजिटल रूप से सोना खरीद-बेच और गिरवी रख सकेंगे।
Augmont Enterprises, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के साथ मिलकर भारत में इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (EGRs) के इस्तेमाल को बढ़ाने पर काम कर रही है। ये रिसीट्स निवेशकों को शेयर्स की तरह अपने डीमैट अकाउंट में सोना रखने की सुविधा देती हैं, जिससे इस कीमती धातु को ट्रेड करना या गिरवी रखना आसान हो जाता है। कंपनी का प्लान है कि अगर टैक्स से जुड़ी कुछ दिक्कतें दूर हो जाती हैं, तो अगले तीन महीनों के अंदर वह अपने EGRs को एक्सचेंज पर लिस्ट कर देगी।
GST पर फैसले का इंतजार और मार्केट पर असर
डिजिटल गोल्ड इंस्ट्रूमेंट्स को अपनाने में फिलहाल गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) से जुड़ी चुनौतियां आ रही हैं। अभी, फिजिकल गोल्ड को EGRs में बदलने पर 3% का टैक्स लगता है। Augmont और NSE ने सरकार और रेगुलेटर्स से इस स्ट्रक्चर में बदलाव करने का अनुरोध किया है। उनका प्रस्तावित मॉडल यह है कि टैक्स केवल तब कलेक्ट किया जाए जब कोई इन्वेस्टर अपनी डिजिटल रिसीट को वापस फिजिकल गोल्ड में बदलना चाहे। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस एडजस्टमेंट से ही यह प्रोडक्ट निवेशकों के लिए आकर्षक बन पाएगा और दूसरे गोल्ड इन्वेस्टमेंट ऑप्शंस के मुकाबले कंपीटिटिव हो सकेगा।
गोल्ड इकोसिस्टम का फायदा
Augmont इस पहल को सपोर्ट करने के लिए अपने मौजूदा नेटवर्क का इस्तेमाल करेगा। इसमें 4 करोड़ से ज्यादा रजिस्टर्ड यूजर्स और हजारों पार्टनर ज्वैलर्स शामिल हैं, जो फिलहाल उनके गोल्ड ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं। स्टॉक ब्रोकर्स के साथ अपनी इन्फ्रास्ट्रक्चर को इंटीग्रेट करके, कंपनी प्राइस डिस्कवरी और डिलीवरी के लिए एक यूनिफाइड सिस्टम बनाना चाहती है। इस स्ट्रक्चर का मकसद स्टैंडर्ड क्वालिटी और गारंटीड सेटलमेंट प्रदान करना है, जो उन लोगों के लिए खास तौर पर फायदेमंद होगा जो अनऑर्गनाइज्ड गोल्ड मार्केट से दूर जाना चाहते हैं।
गोल्ड मार्केट इंटीग्रेशन
इंडस्ट्री बॉडीज के अनुमान के मुताबिक, भारत में 30,000 से 35,000 टन के बीच प्राइवेट गोल्ड मौजूद है। EGR फ्रेमवर्क का लक्ष्य इस सोने का कुछ हिस्सा एक पारदर्शी, रेगुलेटेड सिस्टम में लाना है, जहां इसे ट्रेड, प्लेज या लेंड किया जा सके। इस कदम को मैन्युफैक्चरर्स के लिए अपनी गोल्ड इन्वेंटरी का इस्तेमाल करके डायरेक्ट लेंडिंग मैकेनिज्म प्रदान करने के तरीके के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि इस डिजिटल ट्रांजिशन के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर काफी हद तक तैयार है, लेकिन बड़े पैमाने पर इसे अपनाने की टाइमलाइन इस बात पर निर्भर करेगी कि टैक्स पॉलिसी कितनी जल्दी स्पष्ट होती है और गोल्ड ETFs या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स जैसे मौजूदा विकल्पों की तुलना में एक्सचेंज-ट्रेडेड गोल्ड प्रोडक्ट्स को मार्केट कैसे अपनाता है।
