एशियाई शेयर बाजारों में बुधवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल **$95.34** प्रति बैरल तक पहुंच गया है। एनर्जी की बढ़ती कीमतों और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं ने निवेशकों के बीच चिंता बढ़ा दी है।
एशियाई फाइनेंशियल मार्केट्स में बुधवार, 2 सितंबर 2026 को कारोबार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। टोक्यो का Nikkei 225 इंडेक्स 2% से अधिक फिसल गया, जबकि दक्षिण कोरिया का KOSPI इंडेक्स 3% तक गिर गया। यह गिरावट मुख्य रूप से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के चलते आई है, जिससे हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल की आपूर्ति बाधित होने का डर पैदा हो गया है।
एनर्जी और महंगाई का खतरा
ग्लोबल बाजारों के लिए सबसे बड़ी चिंता एनर्जी की कीमतों में आया यह उछाल है। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स $95.34 प्रति बैरल के पांच-हफ्ते के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। महंगी एनर्जी से एक ओर महंगाई बढ़ने का खतरा है, तो दूसरी ओर कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि ट्रांसपोर्टेशन और रॉ मटेरियल की लागत अब बढ़ जाएगी।
फेडरल रिजर्व और ब्याज दरों का गणित
जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता के बीच अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी नोट की यील्ड 4.80% के स्तर पर पहुंच गई है। ऊंची बॉन्ड यील्ड के कारण शेयरों का आकर्षण कम हो जाता है। CME Group के FedWatch टूल के आंकड़ों के अनुसार, 16 सितंबर को होने वाली फेडरल रिजर्व की बैठक में ब्याज दरें 25 बेसिस पॉइंट बढ़ने की संभावना अब बढ़कर 67% हो गई है, जो एक हफ्ते पहले महज 39.6% थी।
निवेशकों के लिए संकेत
फिलहाल मार्केट पूरी तरह से मिडिल ईस्ट की खबरों पर टिका है। निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या क्रूड ऑयल की कीमतें यहीं स्थिर होती हैं या और ऊपर जाती हैं। इसके साथ ही, फेडरल रिजर्व के अगले बयानों पर नजर रखना जरूरी होगा, क्योंकि ये संकेत देंगे कि क्या महंगाई के इस दबाव को देखते हुए सेंट्रल बैंक वाकई आक्रामक रुख अपनाएगा या नहीं।
