Arm Holdings: AI का सहारा, शेयर रॉकेट पर!
Arm Holdings के लिए AI की दुनिया किसी वरदान से कम नहीं है। कंपनी के शेयर AI की जबरदस्त डिमांड के चलते रॉकेट की तरह भाग रहे हैं। एनालिस्ट्स का भी इस पर भरोसा कायम है, ज्यादातर ने इसे 'Moderate Buy' रेटिंग दी है और इसका टारगेट प्राइस लगभग $165 रखा है। हाल ही में Wells Fargo ने भी इसे 'Overweight' रेटिंग देते हुए टारगेट प्राइस $165 कर दिया है। कंपनी क्लाउड और एज कंप्यूटिंग के लिए AI-ऑप्टिमाइज्ड CPU डिज़ाइन में अहम भूमिका निभा रही है।
हालांकि, स्टॉक का P/E रेश्यो लगभग 208 के आस-पास है, जो काफी महंगा माना जा सकता है। लेकिन, कंपनी के रेवेन्यू में पिछले साल के मुकाबले लगभग 24% की ग्रोथ देखकर निवेशक उत्साहित हैं। फाइनेंशियल ईयर 2025 में कंपनी ने $4.01 बिलियन का रेवेन्यू दर्ज किया। शेयर साल की शुरुआत से अब तक 21% से ज़्यादा चढ़ चुका है। NVIDIA जैसी बड़ी कंपनियों से कड़ी टक्कर और टेरिफ (Tariffs) जैसे ग्लोबल रिस्क अभी भी चुनौती बने हुए हैं।
On Holding: CEO के इस्तीफे ने मचाया कोहराम!
दूसरी तरफ, स्पोर्ट्स वियर कंपनी On Holding AG के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। CEO Martin Hoffmann के अचानक इस्तीफे की खबर आते ही शेयर 10% तक गिर गए। 1 मई से को-फाउंडर्स David Allemann और Caspar Coppetti कंपनी के नए Co-CEOs की ज़िम्मेदारी संभालेंगे। पिछले CEO के नेतृत्व में कंपनी के रेवेन्यू में 30% की शानदार ग्रोथ देखने को मिली थी, ऐसे में यह लीडरशिप बदलाव थोड़ा चौंकाने वाला है।
कंपनी की मार्केट वैल्यू करीब $25.47 बिलियन है और P/E रेश्यो 55.44 के करीब है, जो बताता है कि निवेशक अभी भी इसमें भविष्य में ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं। एनालिस्ट्स इसे आम तौर पर 'Moderate Buy' रेटिंग दे रहे हैं और इसका टारगेट प्राइस $59-$60 के आस-पास है। हालांकि, बाज़ार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, Nike और Adidas जैसी बड़ी कंपनियों से टक्कर और डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (DTC) सेल्स में धीमी ग्रोथ कंपनी के लिए चिंता का विषय है। कंपनी के ग्रॉस मार्जिन 65% से ऊपर बने हुए हैं, लेकिन लीडरशिप में बदलाव भविष्य की रणनीति और ग्रोथ पर सवाल खड़े कर सकता है।
ग्लोबल टेंशन और बढ़ती तेल कीमतें
मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते तनाव ने ग्लोबल मार्केट में हलचल मचा दी है। तेल की कीमतों में उछाल आया है, Brent क्रूड 1.3% चढ़कर $98.51 प्रति बैरल तक पहुंच गया है, जो सप्लाई में रुकावट के डर को दिखाता है। ऐसे में महंगाई बढ़ने की आशंका और इकोनॉमी पर असर की चिंताएं बढ़ जाती हैं।
एशियाई बाज़ार भी इस असर से अछूते नहीं रहे, जापान और साउथ कोरिया के प्रमुख इंडेक्स गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं। आमतौर पर ऐसे भू-राजनीतिक झटकों (Geopolitical Shocks) में निवेशक सोने जैसी सुरक्षित जगहों का रुख करते हैं, लेकिन इस बार सोने की कीमतें 0.8% गिरकर $4513.90 पर पहुंच गईं। यह दिखाता है कि बाज़ार का व्यवहार थोड़ा जटिल हो गया है।