Ammonia के दाम गिरे: भारतीय फर्टिलाइजर कंपनियों को बड़ी राहत

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AuthorAditya Rao|Published at:
Ammonia के दाम गिरे: भारतीय फर्टिलाइजर कंपनियों को बड़ी राहत

भारतीय फर्टिलाइजर कंपनियों के लिए अच्छी खबर है! जून के अंत से ग्लोबल अमोनिया (Ammonia) की कीमतों में करीब **25%** की गिरावट आई है। इससे NPK फर्टिलाइजर बनाने वाली कंपनियों के लिए जहां लागत कम होगी, वहीं सल्फर (Sulphur) की ऊंची कीमतों की चुनौती बनी हुई है। निवेशक इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि यह नरमी रबी सीजन तक जारी रहती है या नहीं।

अमोनिया की कीमतों में नरमी से लागत घटी

ग्लोबल मार्केट में अमोनिया (Ammonia) की कीमतों में आई भारी गिरावट से भारतीय फर्टिलाइजर कंपनियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। जून के आखिरी हफ्ते से लेकर अब तक अमोनिया की कीमतों में लगभग 25% की कमी दर्ज की गई है। यह गिरावट इस साल की शुरुआत में सप्लाई की कमी के कारण आई कीमतों में तेज उछाल से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करती है। जानकारों का मानना है कि कमजोर इंडस्ट्रियल डिमांड और डिस्ट्रीब्यूटरों के पास पर्याप्त स्टॉक होने के कारण कीमतों में यह नरमी आई है।

NPK उत्पादकों को फायदा, पर सल्फर की मार

अमोनिया, नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम (NPK) फर्टिलाइजर बनाने के लिए एक अहम कच्चा माल है। इसकी कीमतों में आई कमी से NPK फर्टिलाइजर बनाने वाली कंपनियों जैसे Coromandel International, Paradeep Phosphates और Gujarat State Fertilizers & Chemicals (GSFC) की प्रोडक्शन कॉस्ट में कमी आएगी। एनालिस्ट्स का कहना है कि वेस्ट एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के चलते सप्लाई टाइट होने की स्थिति अब खत्म हो गई है।

हालांकि, कंपनियों के लिए राहत पूरी तरह नहीं है। अमोनिया सस्ता हुआ है, लेकिन सल्फर (Sulphur) की कीमतें अभी भी ऊंची बनी हुई हैं और इसकी उपलब्धता भी सीमित है। NPK फर्टिलाइजर के प्रोडक्शन में अमोनिया और सल्फर दोनों की जरूरत होती है। ऐसे में, सल्फर की ऊंची लागत, अमोनिया की सस्ती कीमतों से होने वाले मुनाफे पर पानी फेर सकती है। कुछ कंपनियों ने इन सप्लाई चेन की दिक्कतों के चलते प्रोडक्शन में कटौती भी की है, जिससे सेक्टर के प्रॉफिट आउटलुक पर असर पड़ सकता है।

शेयर बाजार का रिएक्शन और आगे की राह

फर्टिलाइजर कंपनियों के शेयरों में अलग-अलग तरह का रिएक्शन देखने को मिला है। Coromandel International और Paradeep Phosphates जैसे शेयरों में साल-दर-तारीख (YTD) करीब 9% की गिरावट आई है। वहीं, Deepak Fertilisers and Petrochemicals जैसी दूसरी कंपनियों का प्रदर्शन अलग रहा है, जो पिछले पांच साल के औसत वैल्यूएशन से प्रीमियम पर ट्रेड कर रही हैं। यह भी ध्यान रखना अहम है कि अमोनिया की कीमतों में नरमी का फायदा सभी कंपनियों को एक समान नहीं मिलेगा, यह उनके प्रोडक्ट मिक्स, इन्वेंटरी लेवल और किसानों पर लागत डालने की क्षमता पर निर्भर करेगा।

आगे चलकर कीमतों की स्थिरता एक बड़ा सवाल है। फिलहाल मार्केट में सरप्लस है, लेकिन वेस्ट एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति एक बड़ा रिस्क बनी हुई है, जो सप्लाई को बाधित कर सकती है। आने वाले महीनों में, निवेशकों के लिए यह देखना अहम होगा कि कंपनियां आने वाले रबी सीजन के लिए अपनी इनपुट कॉस्ट को कैसे मैनेज करती हैं और सल्फर की कीमतें कब सामान्य होती हैं, जिससे उनके फाइनेंशियल परफॉर्मेंस को सहारा मिल सके।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.