अक्षय तृतीया पर सोना खरीदने से पहले सावधान! कहीं 'प्राइस लॉक' के चक्कर में न फंस जाएं, ETF है सबसे बेहतर दांव

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AuthorAditi Chauhan | Whalesbook News Team

Overview

अक्षय तृतीया पर सोना खरीदने की एडवांस बुकिंग स्कीमें ग्राहकों को कीमतों में बढ़ोतरी से बचाने का वादा करती हैं, लेकिन इनमें छिपे हुए खतरे और शर्तें भी हैं। ज्वैलर्स 'प्राइस लॉक' ऑफर दे रहे हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) जैसे पारदर्शी और रेगुलेटेड निवेश विकल्प कहीं ज्यादा बेहतर हैं।

अक्षय तृतीया के लिए एडवांस गोल्ड बुकिंग

जैसे-जैसे 19 अप्रैल 2026 को आने वाली अक्षय तृतीया नजदीक आ रही है, सोने की कीमतों में अचानक होने वाली बढ़ोतरी से बचने के लिए 'प्राइस लॉक' जैसी एडवांस बुकिंग स्कीमों की मांग बढ़ रही है। इन स्कीमों के तहत ग्राहक थोड़ी सी टोकन राशि देकर आज की सोने की दर तय कर सकते हैं। इसका मतलब है कि आप त्यौहार के दिन तय की गई कीमत या उस दिन की बाजार दर, जो भी कम हो, पर सोना खरीद पाएंगे। अभी 24-कैरेट सोने का भाव लगभग ₹15,557 प्रति ग्राम चल रहा है। ज्वैलर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म इन ऑफर्स को बढ़ावा दे रहे हैं, यह कहकर कि इससे भविष्य में दाम बढ़ने और त्यौहार की भीड़ से बचा जा सकता है। आपको बता दें कि सोने ने पिछले साल अप्रैल से अब तक 60% का शानदार रिटर्न दिया है और पिछले 9 सालों से लगातार मुनाफा कमा रहा है।

'प्राइस लॉक' ऑफर्स के पीछे छिपे रिस्क

लेकिन इन एडवांस बुकिंग डील्स से सावधान रहने की जरूरत है। इन स्कीमों का सबसे बड़ा रिस्क है 'मेकिंग चार्ज' (making charges), जो अक्सर बाद में जोड़े जाते हैं और प्राइस लॉक रेट में शामिल नहीं होते। साथ ही, इन स्कीमों की शर्तें काफी सख्त हो सकती हैं, जैसे डिजाइन या वजन की पसंद सीमित होना, या सिर्फ कुछ खास ज्वैलर्स से ही खरीदारी करना। कई बार एडवांस पेमेंट वापस नहीं मिलता। इन अतिरिक्त शुल्कों और अस्पष्ट नियमों के कारण, फिजिकल गोल्ड की असली कीमत काफी कम हो सकती है।

डिजिटल गोल्ड में रेगुलेशन की कमी, ETF चमके

डिजिटल गोल्ड भले ही सुविधा देता हो, लेकिन यह बड़े पैमाने पर एक अनरेगुलेटेड (unregulated) प्रोडक्ट है। SEBI ने नवंबर 2025 में साफ किया था कि वह डिजिटल गोल्ड को रेगुलेट नहीं करता, यानी निवेशकों को स्टैंडर्ड सुरक्षा नहीं मिलती और वे SEBI के ग्रीवेंस सिस्टम का इस्तेमाल नहीं कर सकते। इससे प्राइवेट कंपनियों से जुड़े जोखिम बढ़ जाते हैं। इसके विपरीत, गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) एक स्पष्ट और रेगुलेटेड निवेश का जरिया हैं। ये स्टॉक एक्सचेंजों पर ट्रेड होते हैं, घरेलू सोने की कीमतों को बारीकी से ट्रैक करते हैं, और इनमें अच्छी लिक्विडिटी (liquidity) के साथ अक्सर कम फीस लगती है, जैसे Nippon India ETF Gold BeES की फीस सिर्फ 0.25% है। बड़े गोल्ड ईटीएफ्स ने शानदार प्रदर्शन किया है, जिनमें एक साल का औसत रिटर्न 58.81% से 62.85% रहा है, और पांच साल का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) करीब 25.78% से 26.11% तक पहुंचा है। मार्च 2026 तक इनका कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹1.71 लाख करोड़ के पार पहुंच गया था, जो निवेशकों का भरोसा दिखाता है। ईटीएफ सोने की स्टोरेज, बीमा और मेकिंग चार्ज जैसी परेशानियों को भी खत्म कर देते हैं, और इनकी कीमतें सीधे मार्केट रेट से जुड़ी होती हैं।

फिजिकल और डिजिटल गोल्ड स्कीमों के रिस्क

फिजिकल और डिजिटल गोल्ड स्कीमों में ये जोखिम मौजूद हैं। ज्वैलर्स के बिजनेस मॉडल में अक्सर इन्वेंटरी मैनेजमेंट और हेजिंग (hedging) की लागत शामिल होती है, जो ग्राहकों पर डाली जाती है। डिजिटल गोल्ड के मामले में, RBI या SEBI जैसे नियामकों की सीधी निगरानी न होने के कारण निवेशक पूरी तरह प्लेटफॉर्म की इंटीग्रिटी (integrity) पर निर्भर होते हैं। ऐसे में किसी प्लेटफॉर्म के फेल होने का बड़ा खतरा है, जो रेगुलेटेड गोल्ड ईटीएफ्स के साथ नहीं है, क्योंकि ईटीएफ्स फिजिकल गोल्ड द्वारा समर्थित होते हैं और ऑडिटिंग व कस्टोडियन (custodian) के सख्त मानक रखते हैं।

गोल्ड प्राइस का अनुमान और ETF की अपील

विश्लेषक भू-राजनीतिक घटनाओं, महंगाई के आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों के फैसलों के कारण सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने का अनुमान लगा रहे हैं। अनुमान है कि अप्रैल 2026 तक सोने की कीमतें ₹1.55–₹1.7 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकती हैं। कई संस्थाएं पोर्टफोलियो में सोने को रखने की सलाह दे रही हैं ताकि बढ़ती आर्थिक अनिश्चितता और वैश्विक जोखिमों से बचाव हो सके। जैसे-जैसे निवेशक स्थिरता और स्पष्ट वैल्यू की तलाश करते हैं, गोल्ड ईटीएफ्स सोने में निवेश के लिए एक टॉप विकल्प बने रहने की उम्मीद है, जो फिजिकल गोल्ड की तुलना में अधिक लिक्विड, रेगुलेटेड और लागत-प्रभावी विकल्प प्रदान करते हैं।

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