Aditya Birla SL Gold ETF ने पिछले एक साल में **45.8%** का शानदार रिटर्न दिया है। यह **₹1,500 करोड़** से ज़्यादा AUM वाले गोल्ड ETF में सबसे बेहतर प्रदर्शन है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि निवेशकों को सिर्फ रिटर्न नहीं, बल्कि एक्सपेंस रेशियो, लिक्विडिटी और ट्रैकिंग एरर जैसी चीज़ों पर भी ध्यान देना चाहिए।
क्या हुआ?
Aditya Birla SL Gold ETF ने एक साल में 45.8% का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) दर्ज किया है। ₹1,500 करोड़ से ज़्यादा की एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) वाले गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) की कैटेगरी में यह सबसे अव्वल रहा है। इसी अवधि में ICICI Prudential Gold ETF और DSP Gold ETF जैसे फंड्स ने भी लगभग 45.8% और 45.6% का रिटर्न दिया है। टॉप पांच फंड्स में ICICI Prudential Gold ETF सबसे बड़ा फंड है, जिसका एसेट ₹27,578.2 करोड़ है।
ETF रिटर्न में अंतर क्यों?
गोल्ड ETF, फिजिकल गोल्ड की डोमेस्टिक कीमत को ट्रैक करने वाले पैसिव इन्वेस्टमेंट विकल्प होते हैं। आदर्श रूप से, सभी गोल्ड ETF को एक जैसे रिटर्न देने चाहिए क्योंकि वे सब एक ही कमोडिटी की कीमत से जुड़े हैं। लेकिन, परफॉर्मेंस में अंतर आता है। यह मुख्य रूप से 'एक्सपेंस रेशियो' (फंड हाउस द्वारा मैनेजमेंट के लिए लिया जाने वाला शुल्क) और 'ट्रैकिंग एरर' (फंड का प्रदर्शन गोल्ड की असल कीमत से कितना मेल खाता है) के कारण होता है। ज़्यादा एक्सपेंस रेशियो रिटर्न को कम करता है, जबकि ट्रैकिंग एरर बताता है कि फंड कितना करीब से गोल्ड की कीमत को फॉलो कर रहा है। यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि बताए गए रिटर्न में ये सब खर्चे पहले से शामिल हैं।
फंड का साइज़ और लिक्विडिटी का महत्व
रिटर्न भले ही पहली चीज़ हो जिस पर निवेशक ध्यान देते हैं, लेकिन ETF का साइज़ भी उतना ही महत्वपूर्ण है। ICICI Prudential Gold ETF जैसे बड़े फंड्स में आमतौर पर बेहतर लिक्विडिटी होती है। इसका मतलब है कि स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेडिंग वॉल्यूम ज़्यादा होता है, जिससे निवेशक आसानी से अपने यूनिट्स खरीद-बेच सकते हैं और कीमत पर ज़्यादा असर नहीं पड़ता। छोटे ETF में खरीद और बिकवाली की कीमत के बीच ज़्यादा अंतर हो सकता है, जिससे अपनी पोजीशन लेना या बाहर निकलना थोड़ा मुश्किल हो सकता है।
छोटी अवधि की अस्थिरता
गोल्ड की कीमतें ग्लोबल मार्केट की कंडीशन से प्रभावित होती हैं, और छोटी अवधि का प्रदर्शन काफी वोलेटाइल (अस्थिर) हो सकता है। हाल के आंकड़ों के मुताबिक, एक महीने की अवधि में गोल्ड ETF में लगभग 9.4% की गिरावट देखी गई। यह दिखाता है कि भले ही गोल्ड को एक लॉन्ग-टर्म हेज (सुरक्षा कवच) माना जाता है, पर यह छोटी अवधि की कीमत की उतार-चढ़ाव से अछूता नहीं है। अलग-अलग समय-सीमाओं, जैसे तीन महीने या तीन साल के प्रदर्शन को देखना, फंड की अस्थिरता को मैनेज करने के तरीके का ज़्यादा संतुलित नज़रिया देता है।
निवेशकों को आगे क्या देखना चाहिए?
निवेशकों को सिर्फ पिछले साल के रिटर्न के आधार पर फैसले नहीं लेने चाहिए। गोल्ड ETF का मूल्यांकन करते समय, इन बातों पर विचार करें:
- एक्सपेंस रेशियो: सालाना मैनेजमेंट फीस की जांच करें। कम एक्सपेंस रेशियो आमतौर पर बेंचमार्क की तुलना में बेहतर लॉन्ग-टर्म रिटर्न देता है।
- ट्रैकिंग एरर: ऐसे फंड्स देखें जो लगातार कम ट्रैकिंग एरर दिखाते हैं, जिसका मतलब है कि वे गोल्ड की कीमतों की चाल को प्रभावी ढंग से कॉपी करते हैं।
- ट्रेडिंग लिक्विडिटी: सुनिश्चित करें कि ETF में एक्सचेंज पर पर्याप्त दैनिक ट्रेडिंग वॉल्यूम हो ताकि आसानी से ट्रांजेक्शन किया जा सके।
- निरंतरता: तीन से पांच साल के प्रदर्शन की समीक्षा करें ताकि यह देखा जा सके कि फंड लगातार गोल्ड की कीमतों को ट्रैक करता है या प्रदर्शन में कोई अस्पष्ट अंतर हैं।
