कॉपर सप्लाई की दिक्कतों और कच्चे माल (feedstock) की अशुद्धियों के कारण Adani Enterprises के Kutch स्थित कॉपर प्लांट का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यह प्लांट, जिसे दस महीने पहले चालू किया गया था, अपनी 500,000 टन सालाना रिफाइंड कॉपर का लक्ष्य हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, अप्रैल 2023 से फरवरी 2024 के बीच प्लांट ने केवल 94,000 टन का उत्पादन किया और मार्च के आखिर में मरम्मत के लिए बंद भी रहा।
यह उत्पादन कंपनी के दावों के बिल्कुल विपरीत है, जिसमें वे प्रगति के तेज होने की बात कर रहे थे। स्वतंत्र सैटेलाइट डेटा फर्म Earth-i के अनुसार, जून 2025 से प्लांट में कोई खास गलाने (smelting) की गतिविधि नहीं दिखी है, जो कंपनी के पूर्ण क्षमता पर चलने और ग्राहकों को सेवा देने के दावों का खंडन करता है। यह अंतर न केवल चीन के बाहर कॉपर सप्लाई में भारत के योगदान पर सवाल उठाता है, बल्कि Adani के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की व्यवहार्यता पर भी चिंताएं पैदा करता है।
कच्चे माल (Feedstock) की समस्या:
उत्पादन में दिक्कत की एक बड़ी वजह कॉपर कॉन्संट्रेट (copper concentrate) में मौजूद अशुद्धियां हैं, जैसे एंटीमनी, आर्सेनिक और यूरेनियम। ये दूषित पदार्थ गलाने की प्रक्रिया (smelting process) को बाधित करते हैं, जिससे कॉपर और सल्फ्यूरिक एसिड की शुद्धता प्रभावित होती है। Adani की खरीद टीम इस समस्या को हल करने के लिए साफ कॉन्संट्रेट की तलाश कर रही है। 500,000 टन की क्षमता वाले इस प्लांट को सालाना करीब 1.6 मिलियन टन कॉन्संट्रेट की जरूरत है। हालांकि, आयात के आंकड़ों से पता चलता है कि फरवरी 2024 से फरवरी 2026 के बीच केवल एक चौथाई मात्रा ही सुरक्षित की गई थी।
यह कमी वैश्विक सप्लाई चेन की जटिलताओं से और बढ़ जाती है। चीन वैश्विक कॉपर स्मेल्टिंग का लगभग 50% हिस्सा नियंत्रित करता है। दुनिया भर में विद्युतीकरण (electrification) और रिन्यूएबल एनर्जी की बढ़ती मांग के कारण कॉपर की मांग बढ़ रही है। हालांकि, चीन में खपत की वृद्धि धीमी हो रही है, जबकि उसकी रिफाइनिंग क्षमता बढ़ी है, जिससे वह कॉपर का एक बड़ा निर्यातक बन गया है। टाइट वैश्विक कॉन्संट्रेट मार्केट में कच्चे माल के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है, जिससे स्मेल्टर मार्जिन पर दबाव है।
अन्य प्रमुख खिलाड़ी और तुलना:
प्रमुख वैश्विक उत्पादकों में Codelco, Glencore, BHP, Freeport-McMoRan और चीन की Jiangxi Copper जैसी कंपनियां शामिल हैं। इसके मुकाबले, भारतीय कंपनी Hindalco Industries ने इसी अवधि में 1 मिलियन टन से अधिक कॉन्संट्रेट का आयात किया, जबकि Kutch Copper प्लांट ने केवल 147,000 टन आयात किया, जो कच्चे माल की सोर्सिंग में एक बड़ा अंतर दिखाता है। Earth-i जैसी सैटेलाइट मॉनिटरिंग फर्मों का कहना है कि जून 2025 के बाद से Kutch प्लांट की गतिविधि न्यूनतम रही है, जबकि नए स्मेल्टर स्थिर संचालन हासिल कर रहे हैं।
वित्तीय स्थिति और विश्लेषकों की राय:
29 अप्रैल 2026 तक, Adani Enterprises Ltd. (ADANIENT.NS) लगभग ₹2,435 पर कारोबार कर रहा था, जिसका P/E 22.75x था, जो इंडस्ट्री के औसत 49.98x से काफी कम है। विश्लेषकों का दृष्टिकोण सकारात्मक बना हुआ है, जिनका 'Buy' रेटिंग का कंसensus है और टारगेट प्राइस INR 2,600 से INR 2,900 के बीच है। वे ग्रीन हाइड्रोजन और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों से वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि, प्लांट की परिचालन संबंधी चुनौतियां निकट अवधि के वित्तीय प्रदर्शन और दीर्घकालिक व्यवहार्यता के लिए जोखिम पैदा करती हैं।
Adani Group की प्रोजेक्ट्स में देरी का इतिहास:
Adani Group का प्रोजेक्ट्स में देरी और लागत बढ़ने का इतिहास रहा है। उदाहरण के लिए, COVID-19 लॉकडाउन ने Adani Transmission प्रोजेक्ट्स में देरी की, और Vizhinjam Port को अनुबंध की शर्तों और बाहरी घटनाओं के कारण काफी देरी का सामना करना पड़ा। हाल ही में, एक अमेरिकी रिश्वतखोरी जांच के कारण TotalEnergies ने Adani Green Energy में निवेश रोका, जिससे ग्रुप-लेवल पर प्रतिष्ठा और वित्तीय चिंताएं बढ़ीं, हालांकि इसका सीधा संबंध कॉपर संचालन से नहीं है।
भविष्य की उम्मीदें और चुनौतियां:
सलाहकार फर्म CRU और Wood Mackenzie ने 2026 में Adani प्लांट से वैश्विक सप्लाई में महत्वपूर्ण योगदान की भविष्यवाणी की थी, जिसमें 175,000 से 385,000 टन उत्पादन का अनुमान लगाया गया था। हालांकि, चल रही तकनीकी और कच्चे माल की चुनौतियां इन पूर्वानुमानों के पुनर्मूल्यांकन को मजबूर कर सकती हैं, जिससे वैश्विक कच्चे माल की कमी और बढ़ सकती है और कॉपर-निर्भर उद्योगों पर असर पड़ सकता है। जबकि विश्लेषक Adani Enterprises के विविध कारोबार को लेकर आशावादी हैं और राजस्व वृद्धि का अनुमान लगाते हुए 'Buy' कंसensus बनाए हुए हैं, Kutch कॉपर प्लांट का भविष्य विश्वसनीय, उच्च-गुणवत्ता वाले कच्चे माल की सोर्सिंग और परिचालन बाधाओं को दूर करने पर निर्भर करेगा। विफलता भारत के घरेलू धातु उत्पादन लक्ष्यों और इस महत्वपूर्ण कमोडिटी क्षेत्र में Adani के कदम के लिए एक झटका साबित हो सकती है।
