Adani Enterprises की Kutch Copper यूनिट का लक्ष्य अगले कुछ तिमाहियों में ₹750-800 करोड़ का स्थिर तिमाही ऑपरेटिंग प्रॉफिट (EBITDA) हासिल करना है। कंपनी प्लांट यूटिलाइजेशन बढ़ाने पर काम कर रही है। हालांकि, कम ग्लोबल रिफाइनिंग फीस के कारण मार्जिन पर दबाव है, फिर भी जून तिमाही में यूनिट ने ₹749 करोड़ का EBITDA दर्ज किया है। निवेशक प्लांट के 75% क्षमता तक पहुंचने और कच्चे माल की उपलब्धता पर नजर रखे हुए हैं।
Adani Kutch Copper का ₹800 करोड़ EBITDA का लक्ष्य!
Adani Enterprises की प्रमुख स्मेल्टर यूनिट, Kutch Copper, ने वित्तीय प्रदर्शन को स्थिर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कंपनी का लक्ष्य अगली तिमाहियों में ₹750-800 करोड़ का तिमाही ऑपरेटिंग प्रॉफिट (EBITDA) हासिल करना है। यह लक्ष्य प्लांट की क्षमता के उपयोग को बढ़ाने पर केंद्रित है, जिसे मैनेजमेंट मौजूदा 52% से बढ़ाकर अगले कुछ तिमाहियों में 75% तक ले जाना चाहता है।
जून तिमाही के नतीजे और ग्लोबल मार्केट का हाल
चालू फाइनेंशियल ईयर की जून तिमाही में, Kutch Copper यूनिट ने ₹10,922 करोड़ के कुल रेवेन्यू पर ₹749 करोड़ का EBITDA दर्ज किया। यह लगभग 7% का ऑपरेटिंग मार्जिन दर्शाता है। कंपनी को हाल ही में अपनी 'Adani Copper' ग्रेड-A कैथोड्स के लिए लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) ब्रांड रजिस्ट्रेशन मिला है, जो इंटरनेशनल मार्केट में बिक्री को बढ़ावा देगा।
हालांकि, कॉपर इंडस्ट्री इस समय चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रही है। स्मेल्टर का मुनाफा मुख्य रूप से ट्रीटमेंट एंड रिफाइनिंग चार्जेस (TC/RCs) पर निर्भर करता है, जो कच्चे कॉपर कॉन्सेंट्रेट को प्रोसेस करने के लिए ली जाने वाली फीस है। कॉपर कॉन्सेंट्रेट की ग्लोबल सप्लाई में भारी कमी के कारण ये फीस ऐतिहासिक निचले स्तर पर आ गई हैं, जिससे पूरे सेक्टर के मार्जिन पर दबाव पड़ा है। नतीजतन, कंपनी के अधिकारियों का अनुमान है कि जैसे-जैसे प्लांट स्थिर होगा और प्रोडक्शन बढ़ेगा, मार्जिन घटकर 5% के करीब आ सकता है।
भारत में स्मेलटिंग क्षमता और प्रतिस्पर्धी माहौल
2018 में Vedanta के कॉपर प्लांट बंद होने के बाद से भारत में स्मेलटिंग क्षमता सीमित रही है, जिसके चलते देश आयात पर निर्भर है। 2024 में 500,000 टन वार्षिक क्षमता के साथ परिचालन शुरू करने वाली Adani की यह यूनिट देश की केवल दो बड़ी स्मेलटिंग यूनिट्स में से एक है। तुलना के लिए, गुजरात के दहेज में दूसरी बड़ी यूनिट संचालित करने वाली Hindalco Industries ने इसी जून तिमाही में ₹918 करोड़ का EBITDA दर्ज किया था।
निवेशकों को इस सेगमेंट में कुछ खास ऑपरेशनल जोखिमों पर भी ध्यान देना चाहिए। यह स्मेलटर अभी भी अपने शुरुआती चरण में है, और किसी भी तकनीकी समस्या या प्लांट में रुकावट से प्रोडक्शन और वित्तीय लक्ष्यों पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, लगातार मुनाफे के लिए कंपनी को टाइट ग्लोबल मार्केट में कॉपर कॉन्सेंट्रेट की आपूर्ति सुनिश्चित करनी होगी और सल्फ्यूरिक एसिड जैसे उप-उत्पादों की कीमत का प्रबंधन करना होगा। अब देखना यह होगा कि कंपनी 75% यूटिलाइजेशन लक्ष्य की ओर कितनी प्रगति करती है और कच्चे माल की कमी से कैसे निपटती है।
