Yasho Industries Share: तूफानी **35%** की तेजी! कंपनी लौटी मुनाफे में, एक्सपेंशन का दिख रहा असर

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AuthorMehul Desai|Published at:
Yasho Industries Share: तूफानी **35%** की तेजी! कंपनी लौटी मुनाफे में, एक्सपेंशन का दिख रहा असर
Overview

Yasho Industries के शेयरधारकों के लिए अच्छी खबर आई है। कंपनी ने मौजूदा फाइनेंशियल ईयर की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में शानदार परफॉरमेंस दिखाते हुए अपना रेवेन्यू **35%** बढ़ाकर **₹201.83 करोड़** कर लिया है। इतना ही नहीं, कंपनी घाटे से बाहर निकलकर **₹4.496 करोड़** का नेट प्रॉफिट (PAT) दर्ज करने में सफल रही है।

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नतीजों का पूरा लेखा-जोखा

Yasho Industries Limited ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के लिए जो नतीजे जारी किए हैं, वे वाकई प्रभावशाली हैं। कंपनी के ऑपरेशन से रेवेन्यू में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 35% का जोरदार उछाल देखने को मिला, जो ₹201.83 करोड़ तक पहुंच गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह आंकड़ा ₹149.30 करोड़ था। अगर पिछली तिमाही से तुलना करें, तो भी रेवेन्यू में 10% की अच्छी बढ़त दर्ज की गई है।

मुनाफे के मोर्चे पर कंपनी ने शानदार वापसी की है। Q3 FY26 में कंपनी ने ₹4.496 करोड़ का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी अवधि में ₹0.82 करोड़ के नेट लॉस (घाटे) से बिल्कुल अलग तस्वीर दिखाता है। इसके चलते, कंपनी का अर्निंग्स पर शेयर (EPS) ₹3.73 हो गया, जो पिछले साल -₹0.68 था। अगर नौ महीनों (9MFY26) की बात करें, तो रेवेन्यू 19% बढ़कर ₹583.76 करोड़ पर पहुंच गया, जबकि PAT में 1100% से भी ज्यादा की छलांग लगाकर यह ₹12.9981 करोड़ हो गया।

हालांकि, EBITDA मार्जिन में थोड़ी गिरावट आई है, जो Q3 FY25 में 18.50% से घटकर Q3 FY26 में 16.65% रह गया। मैनेजमेंट के मुताबिक, इसका एक कारण Pakhajan फैसिलिटी का ऑप्टिमल यूटिलाइजेशन लेवल से नीचे काम करना है। अच्छी बात यह है कि फाइनेंस कॉस्ट (Finance Cost) में भारी कमी आई है, जो पिछले साल के मुकाबले काफी कम हुई है। इसी वजह से प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) पिछले साल के ₹18.70 करोड़ के घाटे से सुधरकर ₹56.65 करोड़ पर पहुंच गया।

भविष्य की राह और ग्रोथ के प्लान्स

कंपनी मैनेजमेंट का लक्ष्य है कि फाइनेंशियल ईयर 2028 (FY28) तक रेवेन्यू को लगभग ₹1,500 करोड़ तक पहुंचाया जाए। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए Pakhajan फैसिलिटी के यूटिलाइजेशन को करीब 80-85% तक ले जाना और नए प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक शुरू करना अहम होगा।

ग्रोथ का एक बड़ा जरिया एक बड़ी मल्टीनेशनल कॉर्पोरेशन (MNC) के साथ एक स्ट्रेटेजिक मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट है। इस प्रोजेक्ट पर ₹85-90 करोड़ का निवेश होगा, जिसके लिए कंपनी को ₹19.9 करोड़ की एडवांस पेमेंट भी मिल चुकी है। इसका कमर्शियलाइजेशन (Commercialization) Q1 FY28 तक शुरू होने की उम्मीद है।

इसके अलावा, कंपनी ने ज्यादा डिमांड वाली प्रोडक्ट कैटेगरी के लिए दो नई मैन्युफैक्चरिंग लाइन्स में ₹25.9 करोड़ का निवेश किया है। मार्च 2026 तक इनके ट्रायल रन शुरू हो सकते हैं और Q1 FY27 तक इनका कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा।

अप्रैल 2024 में शुरू हुई Pakhajan फैसिलिटी पर कंपनी का खास फोकस है। मार्च 2025 तक इसका यूटिलाइजेशन 50% से भी कम था, लेकिन मैनेजमेंट को उम्मीद है कि FY26 तक यह 70% और FY28 तक 80-85% तक पहुंच जाएगा। इस फैसिलिटी के लिए 42 एकड़ की जमीन है, जिसमें आगे विस्तार की काफी गुंजाइश है।

अपने बिजनेस को सुरक्षित बनाने के लिए, Yasho Industries साउथ अमेरिका, अफ्रीका और एशिया के दूसरे बाजारों में ज्योग्राफिकल डायवर्सिफिकेशन (Geographical Diversification) पर भी काम कर रही है, ताकि किसी एक रीजन पर निर्भरता कम हो सके। कंपनी R&D (Research & Development) पर भी ध्यान दे रही है और नए केमिकल्स की खोज कर रही है, खासकर ऐसे मॉलिक्यूल्स पर जो अच्छा एनुअल रेवेन्यू जेनरेट कर सकें।

फाइनेंशियल डीप डाइव और रिस्क फैक्टर्स

फिलहाल, Yasho Industries पर कुल ₹560 करोड़ का कर्ज है, जिसमें ₹500 करोड़ बैंक लोन और ₹50 करोड़ प्रमोटर्स का कर्ज शामिल है। कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेशियो (Debt-to-Equity Ratio) घटकर करीब 1.35 हो गया है, जो पहले से कम है। हालांकि, इंटरेस्ट कवरेज रेशियो (Interest Coverage Ratio) करीब 1.14x से 1.2x के आसपास है, जो थोड़ा चिंताजनक है क्योंकि यह दिखाता है कि कंपनी की कमाई से ब्याज का भुगतान मुश्किल से हो पा रहा है।

वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट (Working Capital Management) भी एक ऐसा क्षेत्र है जिस पर मैनेजमेंट ध्यान दे रहा है। इन्वेंटरी लेवल काफी हाई हैं, जो करीब 170 दिन के हैं। कंपनी इन्वेंटरी को कम करने, रिसीवेबल्स (Receivables) को बेहतर बनाने और प्रोडक्शन साइकिल्स को सिंक करने की कोशिश कर रही है।

मुख्य जोखिम और चुनौतियाँ:

  • Pakhajan यूटिलाइजेशन: Pakhajan फैसिलिटी का कम यूटिलाइजेशन मार्जिन पर असर डाल रहा है।
  • मार्जिन प्रेशर: प्रोडक्ट मिक्स में बदलाव और कम मार्जिन वाले प्रोडक्ट्स की बिक्री से मार्जिन पर दबाव।
  • कर्ज का स्तर: डेट-टू-इक्विटी रेशियो अभी भी ज्यादा है और इंटरेस्ट कवरेज रेशियो चिंता का विषय है।
  • कम्पटीशन: खासकर ल्यूब एडिटिव मार्केट में चीनी कंपनियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा।
  • वर्किंग कैपिटल: हाई इन्वेंटरी डेज (लगभग 170 दिन) से वर्किंग कैपिटल पर दबाव।

पीयर कंपैरिजन (Peer Comparison)

स्पेशियलिटी केमिकल्स सेक्टर में, Yasho Industries का Q3 FY26 का परफॉरमेंस, खासकर 35% रेवेन्यू ग्रोथ और मुनाफे में वापसी, काफी अहम है। हालांकि, इसके मुकाबले कुछ पीयर्स (Peers) के नतीजे मिले-जुले रहे हैं:

  • NOCIL Ltd.: इस कंपनी ने हाल की तिमाहियों में रेवेन्यू में गिरावट और प्रॉफिट में बड़ी कमी देखी है।
  • Sumitomo Chemical India: इस कंपनी ने भी Q3 FY26 में रेवेन्यू में गिरावट और प्रॉफिट मार्जिन कम होते देखा है।
  • Laxmi Organic Industries: इस पीयर ने भी रेवेन्यू में गिरावट और कुछ सेगमेंट्स में नेगेटिव EBITDA मार्जिन का सामना किया है।
  • Aarti Industries: इसके विपरीत, Aarti Industries ने Q3 FY26 में रेवेन्यू, EBITDA और PAT में मजबूत ग्रोथ दर्ज की है।

अपने पीयर्स की तुलना में, Yasho Industries की आक्रामक रेवेन्यू ग्रोथ और PAT में सफल वापसी सकारात्मक संकेत हैं। हालांकि, इसका हाई डेट लेवल और वर्किंग कैपिटल इंटेंसिटी पर नजर रखने की जरूरत है।

कॉर्पोरेट गवर्नेंस अपडेट

एक कॉर्पोरेट गवर्नेंस डेवलपमेंट के तहत, शेयरहोल्डर्स ने फरवरी 2026 में तीन प्रमोटर ग्रुप मेंबर्स को पब्लिक शेयरहोल्डर्स के रूप में रीक्लासिफाई करने की मंजूरी दी है, जिसमें 0.08% की छोटी हिस्सेदारी शामिल है। इस कदम से कंपनी के कंट्रोल स्ट्रक्चर में कोई बदलाव नहीं आया है। Yasho Industries ने अक्टूबर 2024 में कंप्लायंस ऑफिसर की देरी से नियुक्ति के लिए ₹34,220 का छोटा जुर्माना भी भरा था, जिसे कंपनी ने ठीक कर लिया है।

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