तिमाही नतीजों पर गहरी नजर
Vishnu Chemicals Limited ने मौजूदा फाइनेंशियल ईयर (FY26) की तीसरी तिमाही में मजबूत नतीजे पेश किए हैं, भले ही ग्लोबल इकोनॉमी थोड़ी धीमी रही हो। कंसोलिडेटेड ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹411.3 करोड़ रहा, जो पिछली तिमाही (Q2 FY26) के ₹401.1 करोड़ की तुलना में 2.5% अधिक है। कंपनी के ग्रॉस मार्जिन में भी अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली, जो Q3 FY26 में 44.8% रहा, जबकि Q2 FY26 में यह 43.1% था – यानी 1.7 प्रतिशत अंक का इजाफा। कंसोलिडेटेड EBITDA में 6% का इजाफा हुआ और यह ₹61.7 करोड़ पर पहुंच गया। इसके चलते EBITDA मार्जिन 14.5% से सुधरकर 15% हो गया, जो 0.5 प्रतिशत अंक की बढ़त है। तिमाही के लिए नेट प्रॉफिट ₹33.7 करोड़ रहा, जो पिछली तिमाही से 2.6% अधिक है।
नौ महीनों का प्रदर्शन
इसके अलावा, 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त हुए नौ महीनों (9M FY26) के लिए, कंसोलिडेटेड ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹1,159 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान अवधि (9M FY25) के ₹1,053 करोड़ की तुलना में 10% ज्यादा है। ग्रॉस प्रॉफिट 9.2% YoY बढ़कर ₹515.2 करोड़ हुआ। EBITDA में 6.9% YoY का इजाफा देखा गया और यह ₹175.6 करोड़ रहा, जबकि नेट प्रॉफिट में 12.7% YoY की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह ₹98.8 करोड़ पर पहुंच गया। 9M FY26 में डोमेस्टिक और एक्सपोर्ट बिक्री का अनुपात संतुलित रहा, जो क्रमशः 49% और 51% था।
भविष्य की खास योजनाएं
कंपनी के मैनेजमेंट ने अपनी खास रणनीतिक पहलों का खुलासा किया है। इसमें साउथ अफ्रीका में एक माइनिंग कॉम्प्लेक्स का सफल अधिग्रहण शामिल है, जो कच्चे माल की सप्लाई को सुरक्षित करने के लिए एक बड़ा कदम है। इस माइन से अगले फाइनेंशियल ईयर (FY27) की पहली तिमाही से फेज्ड ऑपरेशन शुरू होने की उम्मीद है। इसके साथ ही, Vishnu Strontium Private Limited ने Q2 FY26 में स्ट्रॉन्टियम कार्बोनेट (Strontium Carbonate) कोर्शियल करना शुरू कर दिया है, जिसका इस्तेमाल मैग्नेट, सेरामिक्स और मेटालर्जी में होगा। इससे नियमित बिक्री FY27 की पहली तिमाही से शुरू होने की उम्मीद है। इस सेगमेंट से 50-52% के ग्रॉस मार्जिन और 80% यूटिलाइजेशन पर 1.5-1.8 के एसेट टर्न की उम्मीद है।
नई कैपेसिटी और मार्जिन का लक्ष्य
कंपनी DMSO (Dimethyl Sulfoxide) और कुछ खास स्पेशलिटी डेरिवेटिव्स के लिए नई प्रोडक्शन लाइन्स भी शुरू करने की तैयारी में है, जिन्हें FY27 के अंत तक कोर्शियल करने का लक्ष्य है। मैनेजमेंट को इस बात का भरोसा है कि FY28 तक कंपनी अपने ओवरऑल EBITDA मार्जिन को 20% के स्तर तक पहुंचाने में कामयाब होगी। इस लक्ष्य को हासिल करने में क्रोम अयस्क अधिग्रहण, बढ़ी हुई इकॉनमीज ऑफ स्केल, वैल्यू एडिशन और बेहतर प्रोडक्ट मिक्स का अहम योगदान होगा। कंपनी FY26 के लिए ₹180-190 करोड़ (DMSO और साउथ अफ्रीका माइन सहित) और FY27 के लिए लगभग ₹300 करोड़ (क्रोम ऑक्साइड ग्रीन, क्रोम मेटल, DMSO के लिए) का कैपेक्स (CAPEX) करने की योजना बना रही है।
आगे की राह और मौके
हालांकि, साउथ अफ्रीका माइन के इंटीग्रेशन और नए प्रोडक्ट्स (जैसे DMSO) को बड़े पैमाने पर लाने में कुछ एग्जीक्यूशन रिस्क (execution risks) मौजूद हैं। ग्लोबल कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी मुनाफे को प्रभावित कर सकता है। लेकिन, कंपनी फेवरेबल ट्रेड पॉलिसियों का फायदा उठाने के लिए अच्छी पोजीशन में है। इनमें EU का चीनी बेरियम कार्बोनेट पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी, US की टैरिफ में कमी से क्रोम केमिकल एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी की उम्मीद, और भारत द्वारा सेलेस्टाइट अयस्क पर कस्टम ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट शामिल हैं। ये सब मिलकर यूरोपीय एक्सपोर्ट और ओवरऑल कॉम्पिटिटिवनेस में सुधार के लिए बड़े अवसर पैदा करते हैं।