यह Composite Scheme of Arrangement दरअसल कंपनी के बड़े पुनर्गठन (Restructuring) का हिस्सा है, जिसे बोर्ड ने 20 फरवरी, 2026 को मंजूरी दी थी। इस स्कीम के तहत UPL लिमिटेड दो अलग-अलग पब्लिकली लिस्टेड कंपनियां बनाने की तैयारी में है। पहली कंपनी एग्रीकल्चर और स्पेशियल्टी केमिकल्स के डाइवर्सिफाइड बिज़नेस पर फोकस करेगी, जबकि दूसरी कंपनी एक प्योर-प्ले ग्लोबल क्रॉप प्रोटेक्शन प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करेगी। इस कदम का मकसद शेयरधारकों के लिए वैल्यू को अनलॉक करना, हर बिजनेस सेगमेंट को एक स्पष्ट फोकस देना और ऑपरेशनल तालमेल (synergies) को बेहतर बनाना है।
कंपनी के मैनेजमेंट ने 20 फरवरी, 2026 को ही इस स्कीम को मंजूरी दी थी। इसके तहत, UPL अपने इंडिया और इंटरनेशनल क्रॉप प्रोटेक्शन बिज़नेस को एक नई कंपनी, जिसका नाम फिलहाल UPL Global Sustainable Agri Solutions Limited (UPL Global) रखा गया है, में मर्ज करेगी। यह UPL Global स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्ट होगी। वहीं, मौजूदा UPL लिमिटेड एक डाइवर्सिफाइड प्लेटफॉर्म के तौर पर एग्रीकल्चर और स्पेशियल्टी केमिकल्स पर ध्यान केंद्रित रखेगी। यह कदम दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी प्योर-प्ले क्रॉप प्रोटेक्शन कंपनी बनने में मदद करेगा।
इस पुनर्गठन के बाद, UPL दो अलग-अलग लिस्टेड कंपनियों में बंट जाएगी: एक डाइवर्सिफाइड UPL और दूसरी प्योर-प्ले क्रॉप प्रोटेक्शन कंपनी UPL Global। कंपनी का लक्ष्य है कि इससे शेयरधारकों को अलग-अलग निवेश रणनीतियों के अनुसार स्पष्ट विकल्प मिलें और वैल्यू अनलॉक हो। हर मौजूदा UPL लिमिटेड के एक शेयर के बदले शेयरधारकों को नई UPL Global एंटिटी का भी एक शेयर मिलेगा। इससे दोनों कंपनियों को अपने मुख्य बिज़नेस एरिया पर ज़्यादा फोकस करने और वित्तीय लचीलापन (financial flexibility) बढ़ाने में मदद मिलेगी।
हालांकि, यह पूरी Composite Scheme of Arrangement कई ज़रूरी मंजूरियों पर निर्भर करती है। इसमें SEBI, CCI, RBI, नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), स्टॉक एक्सचेंजों के साथ-साथ शेयरधारकों और लेनदारों (creditors) की सहमति भी शामिल है। इन सभी मंजूरियों में किसी भी तरह की देरी या नकारात्मक परिणाम स्कीम के फाइनल होने में दिक्कत पैदा कर सकते हैं।
कंपनी को उम्मीद है कि यह पूरा पुनर्गठन सभी ज़रूरी मंजूरियां मिलने के बाद अगले 12 से 15 महीनों के भीतर पूरा हो जाएगा। निवेशकों को अब SEBI, CCI, RBI और NCLT जैसी रेगुलेटरी बॉडीज़ से मिलने वाली मंजुरियों पर पैनी नज़र रखनी होगी। साथ ही, शेयरधारकों और लेनदारों की मीटिंग और वोटिंग नतीजों पर भी ध्यान देना होगा। इस स्कीम के पूरा होने की समय-सीमा और नई UPL Global एंटिटी के लिस्टिंग की खबरों पर भी नज़र रहेगी।