Thirumalai Chemicals: ₹47 Cr का झटका! तिमाही नतीजों में भारी नुकसान, पर USA प्लांट का इंतजार

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AuthorAditya Rao|Published at:
Thirumalai Chemicals: ₹47 Cr का झटका! तिमाही नतीजों में भारी नुकसान, पर USA प्लांट का इंतजार
Overview

Thirumalai Chemicals ने **2025-26** के तीसरे फाइनेंशियल ईयर (Q3 FY26) में **₹47 करोड़** का कंसोलिडेटेड नेट लॉस (Net Loss) दर्ज किया है। इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू (Revenue) **₹420 करोड़** रहा। कंपनी ने इस गिरावट का मुख्य कारण ग्लोबल केमिकल मार्केट में आई कमजोरी और टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितताओं को बताया है। हालांकि, भविष्य के लिए एक अच्छी खबर यह है कि USA में कंपनी का नया प्लांट दिसंबर **2025** तक चालू होने वाला है, जो कंपनी के ग्लोबल विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम है।

नतीजों पर ग्लोबल मार्केट का साया, USA प्लांट से उम्मीदें

Thirumalai Chemicals के नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे। कंपनी ने 2025-26 के तीसरे क्वार्टर में ₹47 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी अवधि के ₹42 करोड़ के नुकसान से थोड़ा ज्यादा है। वहीं, कंपनी का कुल रेवेन्यू (Total Income) भी घटकर ₹420 करोड़ पर आ गया, जो पिछले साल ₹447 करोड़ था।

पिछले नौ महीनों (9M FY26) की बात करें तो, कंसोलिडेटेड नेट लॉस बढ़कर ₹140 करोड़ हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹32 करोड़ था। इस दौरान कुल इनकम भी ₹1,322 करोड़ रही, जो पिछले साल ₹1,539 करोड़ थी।

क्यों आई गिरावट?

कंपनी का कहना है कि ग्लोबल मार्केट में जारी मंदी, प्लांट यूटिलाइजेशन रेट का 70-75% के आसपास रहना और खासकर चीन में मांग में आई कमी ने कंपनी के प्रदर्शन को प्रभावित किया है। Phthalic Anhydride (PAn) जैसे प्रमुख प्रोडक्ट्स की मांग में कमी देखी गई है।

USA प्लांट से भविष्य की राह

इन चुनौतियों के बावजूद, कंपनी अमेरिका में अपने प्लांट को लेकर काफी आगे बढ़ चुकी है। USA में Maleic Anhydride (MAn) का उत्पादन करने वाली पहली फेज का कमर्शियल ऑपरेशन दिसंबर 2025 तक शुरू होने की उम्मीद है। यह प्लांट 40,000 टन प्रति वर्ष (KTPA) MAn का उत्पादन करेगा और कंपनी को उत्तरी अमेरिका व यूरोपीय बाजारों तक सीधी पहुंच प्रदान करेगा।

आगे क्या देखना महत्वपूर्ण होगा?


  • USA प्लांट का लॉन्च: दिसंबर 2025 में USA प्लांट का सफल कमर्शियल लॉन्च कंपनी के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।

  • ग्लोबल मार्केट में रिकवरी: केमिकल सेक्टर में ग्लोबल डिमांड और कीमतों में सुधार पर नजर रखनी होगी।

  • प्रॉफिट मार्जिन: बढ़ती लागत और प्रतिस्पर्धा के बीच कंपनी अपने मार्जिन को कैसे बेहतर करती है, यह देखना अहम होगा।

  • ट्रेड पॉलिसी: ग्लोबल ट्रेड पॉलिसी में बदलावों का कंपनी के एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट पर असर देखा जा सकता है।

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