Q4 में क्यों हुआ इतना घाटा?
Tata Chemicals का नेट लॉस ₹2,132 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान अवधि में ₹56 करोड़ के छोटे घाटे से काफी ज्यादा है। कंपनी का रेवेन्यू भी 2% घटकर ₹3,438 करोड़ पर आ गया। EBITDA में 16.2% की गिरावट आई और यह ₹274 करोड़ रहा, जिससे प्रॉफिट मार्जिन घटकर 7.97% रह गया।
बेसिक केमिस्ट्री सेगमेंट पर दबाव
कंपनी के लिए सबसे बड़ी चिंता बेसिक केमिस्ट्री सेगमेंट रही, जो भारी दबाव में दिखा। इस सेगमेंट का रेवेन्यू गिरा और यह ₹1,802 करोड़ के भारी नुकसान में आ गया, जबकि पिछले साल इसी सेगमेंट ने मुनाफा कमाया था। वहीं, स्पेशलिटी प्रोडक्ट्स सेगमेंट ने अच्छी परफॉरमेंस दी, जिसमें रेवेन्यू बढ़ा और नुकसान कम हुआ।
डिविडेंड और प्लांट विस्तार का ऐलान
इतने खराब नतीजों के बावजूद, कंपनी के बोर्ड ने साल 2026 के लिए ₹11 प्रति शेयर (110%) का डिविडेंड देने का प्रस्ताव रखा है, जो शेयरधारकों की मंजूरी पर निर्भर करेगा। यह शेयरधारकों को वैल्यू वापस देने की प्रतिबद्धता दिखाता है। इसके साथ ही, मिथापुर प्लांट में नमक (salt) के प्रोडक्शन कैपेसिटी को बढ़ाने के लिए ₹100 करोड़ के निवेश को भी मंजूरी दी गई है। इस विस्तार से अगले 12 महीनों में 82,500 टन प्रति वर्ष की अतिरिक्त क्षमता जोड़ी जाएगी, ताकि बढ़ती बाजार मांग को पूरा किया जा सके।
