केन्या सरकार ने Tata Chemicals को अपना 100 साल पुराना लेक मगाडी सोडा ऐश प्लांट खाली करने का आदेश दिया है। इस फैसले से कंपनी के कुल EBITDA का करीब **6%** हिस्सा दांव पर लग गया है।
केन्या के राष्ट्रपति विलियम रुटो ने Tata Chemicals को लेक मगाडी में अपना सोडा ऐश खनन कार्य पूरी तरह बंद कर जगह खाली करने का निर्देश दिया है। यह कदम जुलाई 2026 में खनन गतिविधियों पर लगी रोक के बाद उठाया गया है, जिसमें कंपनी पर रॉयल्टी भुगतान और रिपोर्टिंग में नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था।
निवेशकों के लिए क्यों है यह चिंताजनक?
केन्या सरकार विदेशी कंपनियों पर दबाव बना रही है कि वे केवल रॉ मटेरियल निकालने के बजाय स्थानीय स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग (जैसे ग्लास फैक्ट्री) करें। इस खबर के बाद कंपनी के शेयर में 2-3% की गिरावट देखी गई। यह फैसिलिटी कंपनी के ग्लोबल सोडा ऐश पोर्टफोलियो का अहम हिस्सा है और फाइनेंशियल ईयर 2026 में कंपनी के कुल EBITDA में इसका योगदान करीब 6% था।
कानूनी लड़ाई और कंपनी का पक्ष
फिलहाल, कंपनी केज्यादो काउंटी के साथ 12.2 बिलियन केन्याई शिलिंग (लगभग $94 मिलियन) के बकाया लैंड-रेट को लेकर कानूनी विवाद में फंसी है, जो मामला केन्या के सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। वहीं, टाटा केमिकल्स का कहना है कि उनकी केन्याई सब्सिडियरी ने सभी जरूरी दस्तावेज 11 अगस्त 2026 तक माइनिंग मंत्रालय को सौंप दिए थे। कंपनी का तर्क है कि वे नियमों का पालन कर रहे हैं और उनका मॉडल दुनिया भर में सोडा ऐश उत्पादन पर ही केंद्रित है।
आगे की राह
निवेशकों के लिए अब सबसे बड़ा रिस्क एसेट इंपेयरमेंट (Asset Impairment) और लंबी कानूनी लड़ाई है। मार्केट की नजर अब इस बात पर है कि सरकार के साथ बातचीत से क्या कोई नया ऑपरेटिंग फ्रेमवर्क निकलकर आता है या कंपनी को अपनी एसेट्स का बड़ा नुकसान झेलना पड़ेगा।
