SRF के शेयर में हालिया गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इस बिकवाली (sell-off) की मुख्य वजह अमेरिका द्वारा चीनी सामानों पर टैरिफ (tariff) लगाए जाने की अटकलें और केमिकल सेक्टर में बढ़ी लागत का दबाव है।
लेकिन कंपनी के मैनेजमेंट ने इन चिंताओं को शांत करने की कोशिश की है। उनका कहना है कि टैरिफ का असर केवल एक छोटे से प्रोडक्ट लाइन पर होगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, SRF ने इस तिमाही में ₹2,700 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया है, जो पिछले साल की इसी अवधि में ₹2,100 करोड़ था। वहीं, नेट प्रॉफिट बढ़कर ₹500 करोड़ हो गया, जबकि पिछले साल यह ₹310 करोड़ था। मैनेजमेंट का यह भी मानना है कि निर्यात (export) की मात्रा स्थिर रहेगी।
मैनेजमेंट ने स्पष्ट किया है कि अगर टैरिफ को लेकर कोई बड़ा बदलाव भी होता है, तो यह केवल R-25 गैस को प्रभावित करेगा, जो कंपनी के कुल निर्यात का एक छोटा हिस्सा है। अनुमान है कि सबसे खराब स्थिति में भी, इससे EBITDA पर केवल ₹40 करोड़ (लगभग 1%) का असर पड़ेगा।
यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब केमिकल सेक्टर की कई कंपनियों के शेयर 2022 में 20-30% तक गिरे हैं। Nifty Chemicals इंडेक्स ने पिछले महीने 6.30% की बढ़त दिखाई है, लेकिन 6 महीने और 1 साल में थोड़ी गिरावट देखी गई है। SRF का P/E रेश्यो (Price-to-Earnings Ratio) करीब 43-47x और P/B रेश्यो (Price-to-Book Ratio) 5.8x के आसपास है। यह UPL (P/E ~25x) से ज़्यादा है, लेकिन Deepak Nitrite (P/E ~47x) और Aarti Industries (P/E ~42x) के बराबर है।
अपने शेयर की हालिया गिरावट के बावजूद, SRF का ट्रैक रिकॉर्ड मजबूत रहा है। पिछले पांच सालों में, कंपनी के रेवेन्यू में 15.9% की CAGR (Compound Annual Growth Rate) से और नेट प्रॉफिट में 29.6% की CAGR से वृद्धि हुई है।
विश्लेषकों (analysts) की राय बंटी हुई है। HSBC ने 'Buy' रेटिंग के साथ ₹3,390 का टारगेट प्राइस दिया है, जो नए कैपेक्स (capex) और स्पेशियलिटी केमिकल पर फोकस को देखते हुए है। वहीं, कुछ विश्लेषकों का औसत टारगेट प्राइस ₹3,073 से ₹3,387 के बीच है। लेकिन, कुछ रिपोर्टों में EPS अनुमानों में संशोधन और 'Hold' रेटिंग के साथ टारगेट प्राइस को घटाकर ₹2,434 कर दिया गया है।
कंपनी ने नए मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स के लिए ₹676 करोड़ के कैपेक्स को मंजूरी भी दी है, जिसमें एल्युमीनियम फॉयल प्लांट और एग्रोकेमिकल इंटरमीडिएट यूनिट शामिल हैं।
हालांकि, SRF का महंगा वैल्यूएशन (valuation) एक जोखिम बना हुआ है, खासकर एक ऐसे सेक्टर में जो साइक्लिकल (cyclical) और कमोडिटी प्राइस (commodity price) के प्रति संवेदनशील है। एनर्जी और कच्चे माल की बढ़ती लागत भी कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव डाल सकती है।
कुल मिलाकर, SRF एक तरफ जहां मजबूत ग्रोथ और निवेश के प्लान्स दिखा रही है, वहीं दूसरी तरफ टैरिफ की चिंताएं और वैल्यूएशन को लेकर विश्लेषकों में मतभेद हैं।