Q4 नतीजों ने मचाया धमाल
SRF Limited के शेयर में आज 6 मई 2026 को करीब 8% की भारी उछाल दर्ज की गई। यह पिछले एक साल की सबसे बड़ी एकदिनी (single-day) तेजी थी। इस उछाल की वजह कंपनी के 31 मार्च 2026 को समाप्त तिमाही के मजबूत नतीजे रहे। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू साल-दर-साल 7% बढ़कर ₹4,615 करोड़ पर पहुंच गया, वहीं नेट प्रॉफिट (Profit After Tax - PAT) 11% की तेज रफ्तार से बढ़कर ₹582 करोड़ दर्ज किया गया। इससे कंपनी की बेहतर मुनाफे वाली ग्रोथ साफ दिखती है। पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 की बात करें तो SRF ने ₹15,787 करोड़ का रेवेन्यू कमाया, जो 7% की ग्रोथ दिखाता है, और PAT में 47% की शानदार बढ़ोतरी के साथ यह ₹1,835 करोड़ रहा। कंपनी के केमिकल और परफॉर्मेंस फिल्म्स सेगमेंट का प्रदर्शन विशेष रूप से सराहनीय रहा।
रेफ्रिजरेंट्स में ₹2300 करोड़ का बड़ा निवेश
तिमाही नतीजों के अलावा, SRF के बोर्ड ने अपने कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) प्लान्स में भी बड़े बदलावों को मंजूरी दी है। कंपनी ने ₹490 करोड़ की BOPP फिल्म मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी के प्रोजेक्ट को अनिश्चित काल के लिए टाल दिया है। इसके बजाय, कंपनी ओडिशा में नए जेनरेशन के रेफ्रिजरेंट्स (Refrigerants) प्रोजेक्ट में भारी निवेश करने जा रही है। इस प्रोजेक्ट का कुल खर्च बढ़ाकर लगभग ₹2,300 करोड़ कर दिया गया है, जो पहले ₹1,100 करोड़ था। इस मल्टी-फेज प्रोजेक्ट में 20,000 टन प्रति वर्ष (TPA) की HFO फैसिलिटी और 30,000 TPA की HF प्लांट शामिल हैं, जिनके 2028 तक पूरी होने की उम्मीद है। इसके साथ ही, Dahej में HFC कैपेसिटी के विस्तार के लिए ₹88 करोड़ के एक अतिरिक्त प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दी गई है। ये फैसले कंपनी की रणनीति में बड़ा बदलाव दिखाते हैं, जिसमें वह रेफ्रिजरेंट्स पर अपना फोकस बढ़ा रही है।
वैल्यूएशन पर चिंता और शेयर का पिछला प्रदर्शन
हालिया उछाल के बावजूद, SRF का शेयर पिछले एक साल में 14.65% गिर चुका है, जबकि BSE 500 इंडेक्स में 3.23% का इजाफा हुआ था। शेयर का मौजूदा P/E रेश्यो 42x से 51x के बीच है, जो इंडस्ट्री के औसत 55.42x से कुछ कम लग सकता है, लेकिन यह अभी भी काफी प्रीमियम वैल्यूएशन माना जा रहा है। यह महंगा वैल्यूएशन, कंपनी के पिछले प्रदर्शन के साथ मिलकर, बाजार को भविष्य में बड़ी ग्रोथ और सफल कैपेक्स एग्जीक्यूशन की उम्मीद पर निर्भर करता है।
एग्जीक्यूशन रिस्क और बाजारी चुनौतियाँ
₹2,300 करोड़ का यह बड़ा निवेश, खासकर अस्थिर वैश्विक अर्थव्यवस्था और प्रबंधन द्वारा बताई गई वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए, महत्वपूर्ण एग्जीक्यूशन रिस्क (execution risk) पैदा करता है। कंपनी का मैनेजमेंट खुद वैश्विक अनिश्चितताओं और एक्सपोर्ट पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंतित है। ₹490 करोड़ के BOPP फिल्म प्लांट को टालने का फैसला SRF की बाजार अनुकूलन क्षमता पर भी सवाल उठाता है। इसके अलावा, भारतीय केमिकल सेक्टर वैश्विक चुनौतियों जैसे ओवरकैपेसिटी, मार्जिन पर दबाव और ट्रेड फ्रैगमेंटेशन का सामना कर रहा है। SRF की पिछली कमाई में गिरावट और पिछले साल के शेयर के पिछड़े प्रदर्शन ने संकेत दिया है कि वह इन मैक्रो फैक्टर्स के प्रति संवेदनशील है। ऐसे में, यह जरूरी होगा कि कंपनी अपने बड़े निवेशों को सफलतापूर्वक अंजाम दे और परिचालन चुनौतियों का सामना करे।
