घाटे से निकली SH Kelkar, 9 महीने में ₹67.4 करोड़ का मुनाफा...
S H Kelkar & Company Ltd (SHK) ने अपने हालिया नतीजों से बाजार को खुश कर दिया है। कंपनी ने 9 महीने की अवधि (9M FY2026) में ₹29.3 करोड़ के पिछले साल के घाटे से निकलकर ₹67.4 करोड़ का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट (Profit) दर्ज किया है। यह एक शानदार वापसी है, जिसके चलते शेयर प्रति इक्विटी (EPS) बढ़कर ₹4.9 हो गया, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹-2.1 था।
Q3 में मुनाफा 86% से ज्यादा उछला, पर मार्जिन पर दबाव
खासकर तीसरी तिमाही (Q3 FY2026) में कंपनी के प्रदर्शन में जबरदस्त तेजी दिखी। इस तिमाही में कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 86.35% बढ़कर ₹32.63 करोड़ पर पहुंच गया, जबकि EPS ₹2.36 रहा। कंपनी का रेवेन्यू भी इस तिमाही में 7.5% बढ़कर ₹583.8 करोड़ (पिछले साल ₹543.2 करोड़) दर्ज किया गया। हालांकि, इसी दौरान EBITDA 13.1% घटकर ₹56.1 करोड़ (पिछले साल ₹64.5 करोड़) रह गया और EBITDA मार्जिन 11.9% से घटकर 9.7% हो गया।
9 महीने का पूरा वित्तीय लेखा-जोखा
पूरे 9 महीने की अवधि (9M FY2026) पर नजर डालें तो, कंपनी का रेवेन्यू पिछले साल के ₹1,556 करोड़ से 10.4% बढ़कर ₹1,718 करोड़ हो गया। हालांकि, इस ग्रोथ के साथ-साथ EBITDA में 18.7% की गिरावट आई और यह ₹182 करोड़ (पिछले साल ₹224 करोड़) पर आ गया। एडजस्टेड EBITDA भी 5.1% घटकर ₹240 करोड़ (पिछले साल ₹253 करोड़) रहा। इसके चलते एडजस्टेड EBITDA मार्जिन 16.4% से घटकर 14.0% पर आ गया, जो कंपनी के ग्रोथ इनवेस्टमेंट्स को दर्शाता है।
US में पहली डील और फ्यूचर ग्रोथ की प्लानिंग
कंपनी मैनेजमेंट का कहना है कि यह मार्जिन पर दबाव स्ट्रैटेजिक इनवेस्टमेंट्स (Strategic Investments) के कारण है, जो कंपनी ग्लोबल ग्रोथ सेंटर्स में कर रही है। सबसे बड़ी खबर यह है कि SH Kelkar ने अपने US क्रिएटिव डेवलपमेंट सेंटर (US CDC) के लिए पहला कस्टमर ऑर्डर हासिल कर लिया है। यह कंपनी की ग्लोबल विस्तार की रणनीति के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
आगे की राह: ग्रोथ और डेट का संतुलन
कंपनी का फोकस फ्यूचर ग्रोथ के लिए अपने ग्लोबल सेंटर्स को मजबूत करने, क्षमता बढ़ाने और इनोवेशन में इनवेस्ट करने पर है। US मार्केट में यह पहली डील इस दिशा में एक बड़ा संकेत है। हालांकि, कंपनी ने यह भी स्वीकार किया है कि इन पहलों के लिए नियर-टर्म में डेट (Debt) बढ़ सकता है। निवेशकों को भविष्य में इस ग्रोथ और कर्ज के प्रबंधन पर बारीकी से नजर रखनी होगी। कंपनी का लक्ष्य मीडियम-टर्म में फाइनेंशियल डिसिप्लिन, कैपिटल स्ट्रक्चर, वर्किंग कैपिटल एफिशिएंसी और कैश कन्वर्जन को बेहतर बनाना है।