तिमाही नतीजों में बड़ी गिरावट, पर 9 महीने में दमदार प्रदर्शन
Rajasthan Petro Synthetics Limited (BSE: 506975, NSE: RAJASPETRO) के शेयरधारकों के लिए मिले-जुले नतीजे आए हैं। कंपनी के फिनाशियल रिजल्ट्स में एक बड़ा विरोधाभास नजर आ रहा है: जहाँ एक ओर तीसरी तिमाही में घाटा हुआ, वहीं साल के पहले नौ महीनों में मुनाफे ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए।
तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में क्या हुआ?
बाजार को कंपनी के तिमाही नतीजों से निराशा हाथ लगी। Rajasthan Petro Synthetics का रेवेन्यू पिछले साल की इसी तिमाही (Q3 FY25) के मुकाबले 89.6% लुढ़ककर सिर्फ ₹57 लाख पर आ गया, जो पिछले साल ₹550 लाख था। रेवेन्यू में इस भारी गिरावट का सीधा असर बॉटम लाइन पर पड़ा और कंपनी ₹65 लाख के नेट प्रॉफिट से सीधे ₹4 लाख के शुद्ध घाटे (Net Loss) में चली गई।
नौ महीनों (9M FY26) में मुनाफे का 'रॉकेट'
लेकिन, जब बात दिसंबर 2025 तक के नौ महीनों की आती है, तो तस्वीर पूरी तरह बदल जाती है। इस अवधि में Rajasthan Petro Synthetics ने कमाल का प्रदर्शन किया है। कंपनी का रेवेन्यू पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 65% बढ़कर ₹1650 लाख हो गया, जो पिछले साल ₹1000 लाख था। नेट प्रॉफिट में तो मानो 'रॉकेट' सी उड़ान देखी गई, जो 863% की जबरदस्त बढ़ोतरी के साथ ₹150 लाख से उछलकर ₹1445 लाख पर पहुँच गया।
नतीजों में कंट्रास्ट और ऑडिटर की राय
यह साफ है कि तीसरी तिमाही में कंपनी को परिचालन संबंधी बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिसके चलते रेवेन्यू और प्रॉफिट दोनों में भारी गिरावट आई। यह प्रदर्शन साल की शुरुआत से लेकर अब तक दर्ज की गई प्रभावशाली ग्रोथ से बिल्कुल अलग है। आंकड़े यह दर्शाते हैं कि साल के नौ महीनों में कंपनी की बुनियाद मजबूत रही है, लेकिन तिमाही स्तर पर कुछ खास दिक्कतें सामने आई थीं।
अच्छी बात यह है कि कंपनी के ऑडिटर Saluja & Associates ने अपनी रिपोर्ट में नतीजों को 'अनमोडिफाइड' (unmodified) बताया है, यानी उन्होंने कहा है कि रिपोर्ट में कोई बड़ी गलती नहीं पाई गई, जो वित्तीय आंकड़ों की प्रामाणिकता पर भरोसा बढ़ाता है।
आगे क्या?
कंपनी के मैनेजमेंट की ओर से भविष्य की रणनीति या आउटलुक (Outlook) को लेकर कोई विशेष जानकारी या गाइडेंस नहीं दिया गया है। ऐसे में, निवेशकों को कंपनी के आगे के सफर का अनुमान इन्हीं मिले-जुले आंकड़ों के आधार पर लगाना होगा।
संभावित जोखिम: निवेशकों के लिए मुख्य चिंता तिमाही नतीजों में दिख रही भारी अस्थिरता (volatility) है। वे इस बात पर बारीकी से नजर रखेंगे कि कंपनी नौ महीनों वाली ग्रोथ को बनाए रख पाती है या नहीं, और तीसरी तिमाही में आई गिरावट के कारणों पर कैसे काबू पाती है।