Pasupati Acrylon: Q3 में मुनाफा 32% गिरा, पर Ethanol की वजह से 9 महीने में ग्रोथ!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Pasupati Acrylon: Q3 में मुनाफा 32% गिरा, पर Ethanol की वजह से 9 महीने में ग्रोथ!
Overview

Pasupati Acrylon Limited के तिमाही नतीजे मिले-जुले रहे हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट (Net Profit) Q3 FY26 में **31.99%** घटकर **₹24.03 करोड़** पर आ गया है, वहीं तिमाही रेवेन्यू (Revenue) भी **1.67%** लुढ़ककर **₹453.11 करोड़** रहा।

मुनाफे में आई गिरावट, पर 9 महीने का आंकड़ा दमदार!

Pasupati Acrylon Limited ने हाल ही में अपने Q3 FY26 के नतीजे पेश किए हैं, और ये नतीजे मिले-जुले संकेत दे रहे हैं। जहाँ एक तरफ तिमाही नतीजों में कंपनी के प्रॉफिट (Profit) में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, वहीं साल के पहले नौ महीनों (9M FY26) के आंकड़े मजबूत ग्रोथ दिखा रहे हैं, जिसका मुख्य श्रेय कंपनी की नई इथेनॉल डिस्टिलरी (Ethanol Distillery) को जा रहा है।

तिमाही नतीजों पर एक नज़र (Q3 FY26):

इस तिमाही में कंपनी का कुल रेवेन्यू (Total Revenue) साल-दर-साल 1.67% घटकर ₹453.11 करोड़ रहा, जो पिछले साल समान अवधि में ₹460.79 करोड़ था। प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में तो 31.99% की भारी गिरावट आई और यह ₹24.03 करोड़ पर आ गया, जबकि पिछले साल यह ₹35.37 करोड़ था। EBITDA में भी 32.30% की कमी आई, जो ₹26.77 करोड़ रहा। नतीजतन, EBITDA मार्जिन (EBITDA Margins) भी काफी सिकुड़ गए, जो पिछले साल के 8.46% से घटकर इस तिमाही में सिर्फ़ 5.81% रह गए। इस दौरान कुल खर्चे (Total Expenses) भी पिछले साल की तुलना में बढ़े हैं।

नौ महीनों में इथेनॉल का कमाल (9M FY26):

वहीं, अगर हम 9 महीनों के नतीजों पर गौर करें, तो तस्वीर काफी अलग दिखती है। इस अवधि में कंपनी का कुल रेवेन्यू 11.59% बढ़कर ₹1535.33 करोड़ हो गया, जो पिछले साल 9 महीनों में ₹1375.90 करोड़ था। इस शानदार ग्रोथ का सबसे बड़ा कारण कंपनी की नई 150 KLPD इथेनॉल डिस्टिलरी रही, जिसने मार्च 2025 में काम शुरू किया था और इस अवधि में सेगमेंट के प्रॉफिट बिफोर एक्सेप्शनल आइटम्स में ₹111.13 करोड़ का योगदान दिया।

नौ महीनों के लिए नेट प्रॉफिट (PAT) 7.36% बढ़कर ₹170.13 करोड़ पर पहुँच गया, जबकि EBITDA 9.09% बढ़कर ₹192.09 करोड़ रहा। इस दौरान EBITDA मार्जिन भी लगभग स्थिर रहे, जो 12.34% थे (9M FY25 में 12.54%)।

एक्सेप्शनल आइटम और बैलेंस शीट पर असर:

इस नौ महीने की अवधि में, लेबर लॉ में हुए एक संशोधन के कारण अतिरिक्त सेवा लागत (past service cost) में बढ़ोतरी के चलते ₹0.57 करोड़ का एक एक्सेप्शनल आइटम (Exceptional Item) भी दर्ज किया गया।

कंपनी की बैलेंस शीट पर नज़र डालें तो, कुल एसेट (Total Assets) 9M FY25 के ₹595.37 करोड़ से बढ़कर 9M FY26 में ₹644.97 करोड़ हो गए। वहीं, कुल लायबिलिटीज (Total Liabilities) में एक बड़ी बढ़ोतरी देखी गई, जो ₹269.23 करोड़ से बढ़कर ₹420.25 करोड़ हो गई हैं। यह बढ़ोतरी संभवतः नई इथेनॉल डिस्टिलरी की स्थापना और उसके विस्तार के लिए लिए गए कर्ज या बढ़ी हुई देनदारियों की ओर इशारा करती है।

मैनेजमेंट की चुप्पी:

खास बात यह है कि कंपनी ने नतीजों के साथ कोई मैनेजमेंट गाइडेंस (Management Guidance) या पोस्ट-अर्निंग्स कॉन्फ्रेंस कॉल (Concall) में कोई कमेंट्री नहीं दी है। ऐसे में, निवेशकों को इस तिमाही गिरावट या भविष्य की योजनाओं पर कंपनी की ओर से सीधा स्पष्टीकरण नहीं मिल पाया है।

जोखिम और आगे की राह:

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या तिमाही नतीजों में आई गिरावट एक अस्थायी झटका है या कंपनी के पारंपरिक बिजनेस में कोई बड़ी समस्या है। इथेनॉल सेगमेंट का प्रदर्शन कितना टिकाऊ रहेगा, यह देखना अहम होगा। साथ ही, लायबिलिटीज में हुई यह भारी बढ़ोतरी कंपनी के वित्तीय जोखिमों को कैसे प्रभावित करती है, इस पर बारीकी से नज़र रखने की जरूरत होगी। बिना किसी स्पष्ट गाइडेंस के, निवेशकों को कंपनी के ऑपरेशंस और मार्केट की चाल पर फोकस करते हुए सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।

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