वैश्विक तनाव के चलते कच्चे तेल के दाम $100 प्रति बैरल के पार चले गए हैं। पेंट बनाने वाली कंपनियों के लिए कच्चे तेल से जुड़े उत्पाद लागत का एक बड़ा हिस्सा, करीब 30-35% होते हैं। ऐसे में, कीमतों में स्थिरता के दौर के बाद अब कंपनियों के मुनाफे (Profit Margins) पर सीधा असर पड़ रहा है। इंडस्ट्री डीलर उम्मीद कर रहे हैं कि अगर तेल के दाम ऊंचे बने रहे तो अप्रैल में कीमतों में 2-5% तक की और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। ऐतिहासिक रूप से, कच्चे तेल की लागत में 10% की बढ़ोतरी सकल लाभ मार्जिन (Gross Profit Margins) को लगभग 1.3% तक घटा सकती है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि कंपनियां ग्राहकों पर इस बढ़ी हुई लागत को कितनी अच्छी तरह डाल पाती हैं।
बढ़ती लागत का असर झेलने के बावजूद, पेंट कंपनियों के प्रति निवेशकों का नजरिया और वैल्यूएशन (Valuations) अलग-अलग हैं। Asian Paints 55-57 के प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो के साथ प्रीमियम वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रही है। हालिया तेल की बढ़त के बाद इसके शेयर में गिरावट आई थी, लेकिन कीमतों के स्थिर होने पर यह संभल गया। एनालिस्ट्स बंटे हुए हैं: Macquarie ने इसे ₹3,100 के टारगेट के साथ 'आउटपरफॉर्म' रेटिंग दी है, जबकि Morgan Stanley ने फरवरी में ग्रोथ की चिंताओं के चलते इसे 'अंडरवेट' रेटिंग दी थी। वहीं, Berger Paints India का P/E रेशियो 45-50 के बीच है और पिछले एक साल में इसके शेयर करीब 25% गिरे हैं। Macquarie ने इसे ₹410 पर 'अंडरपरफॉर्म' रेटिंग दी है, और Morgan Stanley का भी नजरिया 'अंडरवेट' है। हालांकि, Systematix जैसी कुछ फर्म्स इसके लगातार ग्रोथ के चलते इसे पसंद कर रही हैं। Kansai Nerolac Paints सबसे कम वैल्यूएशन मल्टीपल पर है, जिसका P/E रेशियो 10.8-26 के बीच है। इस शेयर पर भी कच्चे तेल की बढ़त का दबाव दिखा है और एनालिस्ट्स का नजरिया सतर्क हो गया है।
कंपनियों को केवल बढ़ती लागतों से ही नहीं, बल्कि अन्य चुनौतियों से भी निपटना पड़ रहा है। Grasim Industries (Birla Opus) और JSW Paints जैसे नए खिलाड़ियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा इन कंपनियों की मजबूत मार्केट पोजिशन को कमजोर कर रही है। इसके अलावा, ग्राहक महंगे प्रीमियम पेंट की जगह सस्ते विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे कंपनियों के लिए लागत वृद्धि को बिक्री की मात्रा (Sales Volumes) को नुकसान पहुंचाए बिना ग्राहकों पर डालना और भी मुश्किल हो जाएगा। पहले की तरह स्थापित कंपनियों की प्राइसिंग पावर अब उतनी मजबूत नहीं रही, यह विचार भी सेक्टर के लिए एक चुनौती है।
कुल मिलाकर, ब्रोकरेज फर्म्स निकट भविष्य में प्रॉफिट मार्जिन को लेकर सतर्क हैं। वे इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि कीमतों में बढ़ोतरी कितनी प्रभावी साबित होगी और कच्चे तेल के दाम कब तक ऊंचे बने रहते हैं। Asian Paints की मजबूत ब्रांड वैल्यू और मार्केट पोजिशन कुछ हद तक सुरक्षा प्रदान करती है, लेकिन यह सेक्टर एक गतिशील माहौल का सामना कर रहा है।
