नतीजों का पूरा लेखा-जोखा
Oriental Aromatics Limited ने फाइनेंशियल ईयर 2025 की तीसरी तिमाही (Q3 FY25) के अपने नतीजे जारी कर दिए हैं, जो स्टैंडअलोन (Standalone) और कंसोलिडेटेड (Consolidated) दोनों आधारों पर मिले-जुले रहे हैं। जहां कंपनी के मुख्य कारोबार में अच्छी ग्रोथ दिखी, वहीं सब्सिडियरी के ऑपरेशनल खर्चों ने कंसोलिडेटेड नतीजों पर भारी असर डाला है।
स्टैंडअलोन परफॉरमेंस:
- तिमाही में कंपनी का ऑपरेशंस रेवेन्यू पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 13.2% बढ़कर ₹25,202.80 लाख पर पहुंच गया।
- नौ महीनों के दौरान भी रेवेन्यू में 10.5% की अच्छी बढ़ोतरी देखी गई और यह ₹74,622.25 लाख रहा।
- हालांकि, स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट में बड़ी गिरावट आई है। तिमाही के लिए यह 66.2% घटकर ₹361.86 लाख रह गया। नौ महीनों के लिए भी प्रॉफिट 58.4% गिरकर ₹1,609.03 लाख रहा। इसके पीछे मार्जिन पर बढ़ा हुआ दबाव और लागतों में बढ़ोतरी को मुख्य कारण बताया गया है।
कंसोलिडेटेड परफॉरमेंस:
- पूरे ग्रुप का प्रदर्शन चिंताजनक रहा। Q3 FY25 में कंपनी को ₹191.80 लाख का नेट लॉस हुआ, जबकि पिछले साल की इसी तिमाही में ₹714.37 लाख का प्रॉफिट था।
- नौ महीनों के कंसोलिडेटेड नतीजों की बात करें तो, कंपनी ₹67.57 लाख के लॉस में रही, जबकि पिछले साल इसी अवधि में ₹3,290.58 लाख का भारी मुनाफा था।
नई सब्सिडियरी का असर:
- इस कंसोलिडेटेड घाटे की सबसे बड़ी वजह कंपनी की पूरी तरह से मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी, Oriental Aromatics & Sons Limited है। इस सब्सिडियरी ने महाराष्ट्र के महाड में अपनी नई ग्रीनफील्ड फैसिलिटी (Greenfield Facility) से 12 नवंबर, 2024 को कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू किया था।
- इस नई इकाई से Q3 FY25 में ₹555.55 लाख (डेफर्ड टैक्स क्रेडिट को घटाकर) का ऑपरेशनल लॉस दर्ज किया गया। वहीं, नौ महीनों में यह लॉस ₹1,682.19 लाख रहा।
- इसके अलावा, कंसोलिडेटेड आधार पर फाइनेंस कॉस्ट (Finance Cost) और डेप्रिसिएशन (Depreciation) में भी बढ़ोतरी देखी गई है, जो सीधे तौर पर नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी से जुड़ी हुई है।
निवेशकों के लिए मायने:
स्टैंडअलोन नतीजों में ग्रोथ के बावजूद, कंसोलिडेटेड नतीजों का इस तरह से गिरना निवेशकों के लिए चिंता का विषय है। नई सब्सिडियरी के शुरुआती नुकसानों का असर फिलहाल कंपनी की बॉटम लाइन पर दिख रहा है। बाजार की नजरें अब इस बात पर होंगी कि यह नई फैसिलिटी कब तक प्रॉफिटेबल बनती है और कंसोलिडेटेड परफॉरमेंस को कब तक सहारा दे पाती है। कंपनी की ओर से इस बारे में कोई स्पष्ट गाइडेंस (Guidance) न होने से भविष्य की राह थोड़ी अनिश्चित लग रही है।
मुख्य जोखिम और आगे की राह:
- मुख्य जोखिम: महाड फैसिलिटी के चालू होने में लंबा समय लगना या उम्मीद से ज्यादा लागत आना, जिससे लगातार कंसोलिडेटेड लॉस हो सकता है। स्टैंडअलोन मार्जिन में और गिरावट भी एक बड़ा जोखिम है। कंपनी न्यू लेबर कोड्स (New Labour Codes) से जुड़े रेगुलेटरी बदलावों का भी आकलन कर रही है, हालांकि फिलहाल कोई बड़ा असर नहीं दिख रहा है।
- भविष्य की रणनीति: निवेशकों की निगाहें नई महाराष्ट्र प्लांट के प्रोडक्शन ramp-up और लागतों को कंट्रोल करने की क्षमता पर टिकी होंगी। साथ ही, स्टैंडअलोन मार्जिन को सुधारने की कंपनी की कोशिशें भी प्रदर्शन के लिए अहम होंगी।