कलकत्ता हाई कोर्ट ने NOCIL के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाते हुए Finorchem पर अंतरिम रोक (Interim Injunction) लगा दी है। कंपनी के पेटेंटेड 4-ADPA मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस को मिली इस कानूनी सुरक्षा से रबर केमिकल सेक्टर में NOCIL का दबदबा और मजबूत होगा।
कानूनी जीत और पेटेंट की अहमियत
कलकत्ता हाई कोर्ट ने 7 अक्टूबर, 2026 को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए Finorchem Ltd को NOCIL के पेटेंटेड प्रोसेस का इस्तेमाल करने से रोक दिया है। यह विवाद 4-Aminodiphenylamine (4-ADPA) के उत्पादन से जुड़ा है, जो रबर और पॉलीमर इंडस्ट्री में एंटीऑक्सीडेंट के रूप में एक जरूरी केमिकल माना जाता है। NOCIL के पास इस प्रोसेस के लिए 3 प्रमुख भारतीय पेटेंट (नंबर 341922, 366559, और 389262) मौजूद हैं। कोर्ट ने 'क्लियर द वे' (Clear the Way) सिद्धांत का हवाला देते हुए कंपनी के पक्ष में फैसला सुनाया है। इसके अलावा, मामला कंपनी के पूर्व कर्मचारी द्वारा ट्रेड सीक्रेट्स चुराने और गोपनीयता भंग करने के आरोपों से भी जुड़ा है।
फाइनेंशियल सेहत और बाजार की चुनौती
यह कानूनी कामयाबी NOCIL के लिए ऐसे समय में आई है जब कंपनी का कामकाज तेजी से बढ़ रहा है। Q2 FY2027 के नतीजों में कंपनी ने ₹427 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया है, जो पिछले साल के मुकाबले 33% ज्यादा है। कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹24 करोड़ रहा है। सबसे अच्छी बात यह है कि कंपनी पर कोई बाहरी कर्ज (Nil Debt) नहीं है, जो कानूनी लड़ाई के खर्च को संभालने में मददगार साबित होगा।
हालांकि, चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। रबर केमिकल सेक्टर में चीन, कोरिया, थाईलैंड और यूरोपीय देशों से आने वाले सस्ते इंपोर्ट (केमिकल डंपिंग) के कारण मार्जिन पर दबाव रहता है। कंपनी की कमाई काफी हद तक सरकार द्वारा लगाए जाने वाले एंटी-डंपिंग ड्यूटी (Anti-dumping duty) पर निर्भर करती है। भविष्य में निवेशकों की नजर इस मामले के फाइनल फैसले और ग्लोबल लेवल पर केमिकल की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर बनी रहेगी।
