कैपेक्स का प्लान और शेयर में आई तेजी
NOCIL के बोर्ड ने कंपनी के Dahej स्थित प्लांट में ₹130 करोड़ की क्षमता विस्तार (capacity expansion) को हरी झंडी दे दी है। यह विस्तार फाइनेंशियल ईयर 2026 की पहली छमाही तक पूरा होने की उम्मीद है, और इसमें बैकवर्ड इंटीग्रेशन (backward integration) भी शामिल है। इस कदम का मकसद भविष्य में कंपनी के रेवेन्यू को बढ़ाना और मार्केट में उसकी स्थिति को और मजबूत करना है। इस खबर ने शेयर बाजार में हलचल मचा दी, और NOCIL के स्टॉक में 12% की भारी उछाल आई, जो पिछले तीन दिनों में 28% की बढ़त दिखा रहा है। आज 60.9 मिलियन से ज़्यादा शेयर ट्रेड हुए, जो रोज़ाना के औसत से करीब दस गुना ज़्यादा है।
वैल्यूएशन और कंपटीशन की चुनौतियाँ
NOCIL का मुख्य कारोबार रबर केमिकल्स (rubber chemicals) के क्षेत्र में है, जहां ग्लोबल मार्केट में सालाना 4-5% की ग्रोथ का अनुमान है। भारत में, टायर इंडस्ट्री अगले दो सालों में 8-10% की दर से बढ़ने की उम्मीद है, जो घरेलू मांग को मजबूत संकेत देता है। हालांकि, NOCIL को K.P.R. Mill जैसे प्रतिद्वंद्वियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, जो अपनी क्षमता बढ़ा रहे हैं। कंपनी का मौजूदा 35x का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो (ratio) इंडस्ट्री एवरेज 30x से काफी ऊपर है, जिससे इसका वैल्यूएशन (valuation) महंगा लग रहा है।
एनालिस्ट की राय और जोखिम
बाजार की सकारात्मक प्रतिक्रिया के बावजूद, कुछ एनालिस्टों को वैल्यूएशन और बढ़ती प्रतिस्पर्धा को लेकर चिंताएं हैं। ग्लोबल इन्वेस्टमेंट्स (Global Investments) जैसी ब्रोकरेज फर्म ने हाल ही में NOCIL की रेटिंग को 'Buy' से घटाकर 'Hold' कर दिया है, और शेयर के लिए ₹160 का टारगेट प्राइस (target price) तय किया है, जो मौजूदा भाव से काफी कम है। कंपनी मैनेजमेंट का अनुमान है कि FY26 में वॉल्यूम ग्रोथ (volume growth) 3-4% के आसपास रहेगी, जो स्टॉक की तेज बढ़त के मुकाबले थोड़ी धीमी लगती है। इसके अलावा, अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में सीजनल फैक्टर्स (seasonal factors) और टैरिफ (tariffs) के कारण अस्थिरता भी ग्रोथ के लिए एक जोखिम बनी हुई है।
