मुनाफे में 3 गुना का उछाल: वजह क्या है?
Manali Petrochemicals Limited (MPL) के कंसोलिडेटेड नतीजों में ₹68 करोड़ का मुनाफा हुआ है, जो पिछले साल की समान अवधि में दर्ज ₹18 करोड़ से 278% से भी ज्यादा की जबरदस्त बढ़ोतरी दिखाता है। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू 2% बढ़कर ₹267 करोड़ पर पहुंच गया, जो पिछले साल ₹261 करोड़ था। कंपनी के चेयरमैन, अश्विन मुथिया ने कॉस्ट ऑप्टिमाइजेशन और इंटरनेशनल सब्सिडियरीज के परफॉर्मेंस पर फोकस करने की बात कही।
लेकिन, इस शानदार मुनाफे की असली कहानी नतीजों में छिपी है। कंपनी की UK-आधारित सब्सिडियरीज़, Notedome Limited और Notedome Europe GmbH की बिक्री से ₹5,216 लाख यानी ₹52.16 करोड़ का एक असाधारण लाभ (Exceptional Gain) हुआ है। यही वह मुख्य वजह है जिसने कंसोलिडेटेड नतीजों को इतना शानदार दिखाया है। इन नतीजों के ऐलान के बाद 2 फरवरी 2026 को स्टॉक में ₹57.52 से ₹58.38 के बीच हल्की हलचल देखी गई।
ऑपरेशनल परफॉर्मेंस की हकीकत
जहाँ एक तरफ कंसोलिडेटेड मुनाफे में बड़ी उछाल दिख रही है, वहीं कंपनी के मुख्य ऑपरेशनल परफॉर्मेंस पर नजर डालें तो तस्वीर कुछ और ही नजर आती है। डोमेस्टिक मार्केट में ऑपरेशनल रेवेन्यू 8.3% बढ़कर ₹195.14 करोड़ हुआ, लेकिन स्टैंडअलोन प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) 41.1% गिरकर सिर्फ ₹4.55 करोड़ रह गया। यह घरेलू बाजार में मार्जिन पर पड़ रहे दबाव का साफ संकेत है।
कंसोलिडेटेड EBITDA मार्जिन भी पिछले साल के 6.46% से घटकर 5.66% रह गया, भले ही EBITDA की कुल राशि थोड़ी बढ़ गई हो। यह स्थिति पिछले कुछ समय से बनी हुई है, जहाँ ऑपरेटिंग प्रॉफिट में तिमाही-दर-तिमाही भारी गिरावट देखी जा रही है। ऐतिहासिक तौर पर देखें तो, Manali Petrochemicals ने पिछले तीन सालों में बिक्री में -23.45% और मुनाफे में -128.52% की कमजोर ग्रोथ दर्ज की है। रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 3.34% और रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड (ROCE) 2.52% जैसे आंकड़े भी काफी कम हैं।
यह कंपनी प्रोपिलीन ग्लाइकॉल (Propylene Glycol) की अकेली डोमेस्टिक प्रोड्यूसर है और प्रोपिलीन ऑक्साइड (Propylene Oxide) बनाने वाली भारत की पहली और सबसे बड़ी कंपनी है। इस सेक्टर में Supreme Petrochem और IG Petrochem जैसी कंपनियां भी हैं। कंपनी ने हाल ही में अपनी UK सब्सिडियरी, Penn Print Solutions Limited को कॉर्पोरेशन टैक्स रिफंड की वसूली के लिए फिर से चालू किया है, जिसका कंपनी पर कोई बड़ा वित्तीय प्रभाव नहीं पड़ने वाला है।
आगे की राह और सेक्टर को सहारा
आगे चलकर, Manali Petrochemicals अपने इंटरनल ऑपरेशनल मेट्रिक्स को बेहतर बनाने और अनुशासित तरीके से काम करने पर जोर दे रही है। वहीं, आने वाले समय में केमिकल सेक्टर को बजट 2026-27 के तहत सरकार की पहलों से सहारा मिल सकता है। इसमें डेडिकेटेड केमिकल पार्क्स और डीकार्बोनाइजेशन टेक्नोलॉजी में निवेश जैसी बातें शामिल हैं, जिनका मकसद डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाना और इंपोर्ट पर निर्भरता कम करना है।
साफ है कि फॉरेन एसेट्स की बिक्री से कंपनी को फिलहाल वित्तीय मजबूती मिली है, लेकिन लंबी अवधि में कंपनी का प्रदर्शन इस बात पर निर्भर करेगा कि वह डोमेस्टिक मार्केट की चुनौतियों से कैसे निपटती है और अपने मुख्य ऑपरेशंस में कितनी कुशलता ला पाती है।