महाराष्ट्र सरकार केमिकल मैन्युफैक्चरिंग को बूस्ट देने के लिए अक्टूबर 2026 तक एक नई पॉलिसी लाने जा रही है। इस योजना के तहत पालघर, रायगढ़ और रत्नागिरी में बड़े इंडस्ट्रियल पार्क बनाए जाएंगे और **₹1,000 करोड़** का निवेश फंड भी तैयार किया गया है।
महाराष्ट्र सरकार केमिकल सेक्टर को ग्लोबल हब बनाने की तैयारी में है। राज्य का लक्ष्य $1 ट्रिलियन इकोनॉमी के आंकड़े तक पहुंचना है, जिसके लिए नई मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी को अक्टूबर 2026 के अंत तक पेश किया जाएगा।
मेगा इंडस्ट्रियल पार्क का प्लान
इस पॉलिसी के तहत सरकार पालघर, रायगढ़ और रत्नागिरी जिलों में विशाल केमिकल इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करेगी। ये पार्क 2,500 से 5,000 एकड़ में फैले होंगे, जिससे कंपनियों को बेहतर लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन का फायदा मिल सके। इसके अलावा, ₹1,000 करोड़ का 'महाराष्ट्र इंडस्ट्रीज एंड इन्वेस्टमेंट फंड' बनाया गया है, जो बायोटेक और बायोप्लास्टिक जैसे क्षेत्रों में R&D को बढ़ावा देगा।
सरकारी स्कीम और सेक्टर का दबदबा
यह पहल केंद्र सरकार की 'BHAVYA Rasayan' स्कीम के साथ मिलकर काम करेगी। वर्तमान में, भारत के कुल केमिकल ग्रॉस वैल्यू एडेड में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 19% है और एक्सपोर्ट में राज्य का योगदान 17% है। राज्य में पहले से ही 3,600 से ज्यादा कारखाने चल रहे हैं।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
लंबी अवधि के नजरिए से देखें तो यह कैपेसिटी विस्तार के संकेत हैं। हालांकि, प्रोजेक्ट की सफलता जमीन अधिग्रहण और पर्यावरण मंजूरी (Environmental Clearances) जैसी चुनौतियों पर निर्भर करेगी। इसके अलावा, नई यूनिट्स को सस्टेनेबल वॉटर और एनर्जी मैनेजमेंट के कड़े नियमों का पालन करना होगा, जो शुरुआती कैपिटल खर्च को बढ़ा सकते हैं। निवेशकों को अब पॉलिसी डॉक्यूमेंट के आने और कंपनियों के यहां प्लांट लगाने की टाइमलाइन पर नजर रखनी चाहिए।
