महाराष्ट्र सरकार नवंबर में एक नई केमिकल पॉलिसी लॉन्च करने की तैयारी में है। इस पहल के तहत Wadhavan Port के पास **5,000 एकड़** में एक विशाल केमिकल हब विकसित किया जाएगा, जिसका लक्ष्य एक्सपोर्ट बढ़ाना और हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है।
महाराष्ट्र सरकार केमिकल सेक्टर के लिए अपनी नई पॉलिसी को नवंबर के पहले हफ्ते में पेश करने जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत के केमिकल आउटपुट में राज्य की हिस्सेदारी को और मजबूत करना है। इस योजना का केंद्रबिंदु पालघर जिले में Wadhavan Port के पास एक बड़ा केमिकल हब होगा, जो 2,500 से 5,000 एकड़ के क्षेत्र में फैला होगा।
लॉजिस्टिक्स और एक्सपोर्ट पर जोर
वर्तमान में, महाराष्ट्र में 3,600 से ज्यादा केमिकल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं, जो देश के ग्रॉस वैल्यू एडेड में करीब 20% का योगदान देती हैं। Wadhavan जैसे डीप-वाटर पोर्ट के पास हब बनने से कंपनियों की लॉजिस्टिक्स लागत में भारी कमी आएगी और एक्सपोर्ट-इंपोर्ट प्रोसेस तेज होगा। सरकार ने Reliance Industries और UPL जैसे बड़े दिग्गजों के साथ परामर्श किया है ताकि रेगुलेटरी एनवायरमेंट को कंपनियों के अनुकूल बनाया जा सके।
हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग की ओर बदलाव
यह पॉलिसी भारत के उस लक्ष्य का हिस्सा है जिसके तहत केमिकल इंडस्ट्री को USD 220 बिलियन से बढ़ाकर USD 1 ट्रिलियन तक पहुंचाना है। फोकस अब कमोडिटी से हटकर हाई-वैल्यू स्पेशलिटी केमिकल्स पर है। सरकार के ₹1 लाख करोड़ के रिसर्च और इनोवेशन फंड से भी इस सेक्टर को नई गति मिलने की उम्मीद है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
निवेशकों को अब यह देखना होगा कि जमीन अधिग्रहण और इंफ्रास्ट्रक्चर की मंजूरी कितनी तेजी से मिलती है। केमिकल सेक्टर पर्यावरणीय नियमों को लेकर काफी संवेदनशील है, इसलिए सरकारी क्लीयरेंस की गति प्रोजेक्ट की कॉस्ट और टाइमलाइन तय करेगी। आने वाले समय में पॉलिसी के तहत मिलने वाली टैक्स छूट और इंसेंटिव्स केमिकल कंपनियों के फाइनेंशियल परफॉर्मेंस के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं।
