एनालिस्ट ने क्यों बरकरार रखी 'Reduce' रेटिंग?
Laxmi Organic Industries के शेयर पर एनालिस्ट फर्म Prabhudas Lilladher ने अपनी 'Reduce' रेटिंग बरकरार रखी है। उन्होंने शेयर के लिए ₹125 का टारगेट प्राइस तय किया है। ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि कंपनी मौजूदा दबावों और 33x FY28E EPS वैल्यूएशन को देखते हुए अभी भी महँगी है। नतीजों के बाद शेयर में काफी दबाव देखा गया, और यह 30 जनवरी, 2026 को अपने 52-हफ्ते के निचले स्तर पर पहुँच गया। पिछले एक साल में शेयर में करीब 34% की गिरावट आई है, जो निवेशकों की चिंताओं को दर्शाता है।
Essential Chemicals पर मार्जिन का दबाव
कंपनी के Essential Chemicals सेगमेंट, जो कुल रेवेन्यू का करीब 70% हिस्सा है, में साल-दर-साल 6% की गिरावट देखी गई। इस सेगमेंट का EBITDAM -5.1% पर आ गया, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 730 बेसिस पॉइंट की बड़ी गिरावट है। इस गिरावट की मुख्य वजह कच्चे माल, जैसे एसिटिक एसिड की कीमतों में आई कमी रही, जिसने इथाइल एसीटेट (जो सेगमेंट के 80-85% उत्पादन का हिस्सा है) के मार्जिन को बुरी तरह प्रभावित किया। एनालिस्ट रिपोर्ट के मुताबिक, निकट भविष्य में इथाइल एसीटेट स्प्रेड पर दबाव बना रहने की आशंका है।
Specialty Chemicals में प्रोडक्ट फेज-आउट का असर
वहीं, Specialty Chemicals सेगमेंट के रेवेन्यू में 30% की भारी गिरावट आई। यह गिरावट मुख्य रूप से एक ऐसे प्रोडक्ट के चरणबद्ध तरीके से बंद होने (phase-out) के कारण हुई, जो सेगमेंट के पोर्टफोलियो का लगभग 10% हिस्सा था। इसके अलावा, पिछले साल की इसी तिमाही में होने वाली कैंपेन आधारित बिक्री का इस तिमाही में न होना भी रेवेन्यू में इस बड़ी गिरावट का कारण बना। कंपनी अगले वित्त वर्ष (FY26) की चौथी तिमाही तक इस बंद किए गए प्रोडक्ट के बदले नया प्रोडक्ट लॉन्च करने की योजना बना रही है।
Fluorochemicals सेगमेंट अभी शुरुआती दौर में
कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण विस्तार क्षेत्र, Fluorochemicals सेगमेंट, जो Miteni S.p.A. एसेट्स के अधिग्रहण के बाद शुरू हुआ है, अभी शुरुआती दौर में है। मैनेजमेंट का अनुमान है कि FY26 के अंत तक यह सेगमेंट अपने ₹2 अरब के पीक रेवेन्यू पोटेंशियल का 40% से 60% हासिल कर लेगा। इस क्षेत्र में कंपनी का प्रवेश, इटली स्थित प्लांट की तकनीक का उपयोग करके, पर्यावरण नियमों और Miteni प्लांट की विरासत को लेकर भी जांच के दायरे में है।
डिमांड के मिले-जुले संकेत और सेक्टर पर दबाव
डिमांड की बात करें तो कंपनी को मिले-जुले संकेत मिल रहे हैं। फार्मास्युटिकल्स (Pharmaceuticals) और प्रिंटिंग व पैकेजिंग (Printing & Packaging) जैसे सब-सेगमेंट में तिमाही-दर-तिमाही स्थिरता देखी गई। हालांकि, एग्रोकेमिकल (Agrochemical) सेक्टर से डिमांड मध्यम रही, जबकि पेंट्स और कोटिंग्स (Paints and Coatings) इंडस्ट्री में नरमी बनी रही। ये मिश्रित डिमांड संकेत कच्चे माल की कीमतों में अस्थिरता और आंतरिक प्रोडक्ट समायोजन के दबावों को और बढ़ा रहे हैं।
समग्र रूप से, भारतीय स्पेशियलिटी केमिकल सेक्टर मजबूत ग्रोथ के अनुमान के बावजूद फिलहाल कुछ मुश्किलों का सामना कर रहा है। चीन से प्राइसिंग प्रेशर और बढ़ी हुई चैनल इन्वेंट्री ने FY2024 में प्रदर्शन को प्रभावित किया था। हालांकि FY2025 में इसमें कुछ सुधार दिखा है, लेकिन ऊँचे ब्याज दरें और वैश्विक स्तर पर नरम कीमतों के कारण वॉल्यूम रिकवरी धीमी बनी हुई है।
मार्केट परफॉर्मेंस और भविष्य का अनुमान
30 जनवरी, 2026 तक Laxmi Organic Industries का मार्केट कैप करीब ₹3,932 करोड़ था, और इसका P/E रेश्यो लगभग 49.4x पर ट्रेड कर रहा था। हालिया गिरावट के बाद, टेक्निकल इंडिकेटर्स 'Strong Sell' का संकेत दे रहे हैं। हालांकि शेयर ने इंट्राडे लो से कुछ रिकवरी दिखाई है, लेकिन Q3FY26 नतीजों में उजागर हुए फंडामेंटल दबाव, प्रमुख उत्पादों में मार्जिन की कमी और सेगमेंट ट्रांजिशन जारी रहने से सावधानी बरतना ज़रूरी है। इथाइल एसीटेट मार्केट में IOLCP, Jubilant Ingrevia और Prakash Chemicals International जैसे प्रतिस्पर्धी हैं, जबकि स्पेशियलिटी केमिकल्स स्पेस में Pidilite Industries और Gujarat Fluorochemicals जैसे बड़े प्लेयर शामिल हैं।