Lactose India Limited के शेयरधारकों के लिए आज का दिन अहम है। कंपनी 28 मार्च 2026 को एक महत्वपूर्ण एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) आयोजित कर रही है, जिसमें Vitanosh Ingredients Private Limited के साथ कंपनी के विलय (amalgamation) को अंतिम मंजूरी दी जानी है। इस मर्जर प्लान के तहत, Vitanosh Ingredients के शेयरधारकों को हर एक शेयर के बदले 0.7946 इक्विटी शेयर Lactose India के मिलेंगे। यह प्रक्रिया 25 से 27 मार्च 2026 तक चलने वाले ई-वोटिंग और 22 से 28 मार्च 2026 की बुक क्लोजर अवधि के बाद पूरी होगी।
Vitanosh Ingredients ने हालिया वित्तीय नतीजों में ₹60.76 करोड़ का रेवेन्यू (total income) दर्ज किया है, वहीं कंपनी को ₹3.66 करोड़ का शुद्ध घाटा (net loss) हुआ है। यह आंकड़े सितंबर 2025 तक की आधी अवधि (half-year ended September 30, 2025) के लिए हैं। पिछले फाइनेंशियल ईयर 2025 के अंत तक, Vitanosh Ingredients का रेवेन्यू ₹118.40 करोड़ था, लेकिन घाटा बढ़कर ₹47.50 करोड़ हो गया था।
इस मर्जर के पीछे का मुख्य उद्देश्य एक एकीकृत (consolidated) इकाई बनाना है, जिसकी मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं बढ़ें, बाजार तक पहुंच व्यापक हो और ऑपरेशनल तालमेल (synergies) से लागत में कमी आए। कंपनी का मानना है कि इन ताकतों का लाभ उठाकर संयुक्त व्यवसाय (combined business) ग्रोथ को आगे बढ़ाएगा और प्रॉफिट मार्जिन में सुधार लाएगा।
Lactose India Limited गुजरात के वडोदरा में फार्मास्युटिकल-ग्रेड लैक्टोज और लैक्टुलोज का एक स्थापित निर्माता है। वहीं, Vitanosh Ingredients, जिसकी स्थापना 2019 में हुई थी, डेयरी प्रोडक्ट्स और मिल्क प्रोसेसिंग सेक्टर में काम करती है। इस मर्जर को स्टॉक एक्सचेंज BSE से 22 अगस्त 2025 को 'नो-ऑब्जेक्शन' और NCLT अहमदाबाद से 13 फरवरी 2026 को पहली मंजूरी मिल चुकी है।
विलय के सफल होने पर, Vitanosh Ingredients, Lactose India Limited में समाहित (merge) हो जाएगी, जिससे एक बड़ी कंपनी का निर्माण होगा। Vitanosh Ingredients के शेयरधारक, स्वीकृत एक्सचेंज रेश्यो के अनुसार, Lactose India के शेयरधारक बन जाएंगे। नई इकाई फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स और डेयरी प्रोसेसिंग के बीच क्रॉस-सेक्टर के अवसरों का लाभ उठाने का लक्ष्य रखेगी।
Lactose India का कारोबार कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, कड़ी प्रतिस्पर्धा और रेगुलेटरी जोखिमों के प्रति संवेदनशील है। इसके अलावा, संयुक्त इकाई को आर्थिक मंदी, मंदी, स्वास्थ्य महामारी और प्राकृतिक आपदाओं जैसे सामान्य जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है। कंपनी का काम वर्किंग कैपिटल-इंटेंसिव भी माना जाता है।
शेयरधारकों को आगामी EGM में विलय योजना को मंजूरी देनी होगी। इसके बाद, मर्जर प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अन्य नियामक और सांविधिक (statutory) मंजूरियां महत्वपूर्ण होंगी। निवेशक विलय के बाद संयुक्त इकाई के वित्तीय प्रदर्शन पर नजर रखेंगे, विशेष रूप से तालमेल (synergy realisation) और Vitanosh की प्रॉफिटेबिलिटी के एकीकरण पर।