लीडरशिप में स्थिरता और फाइनेंशियल रिकवरी
Kiri Industries Limited (KIL) अपने शेयरहोल्डर्स से एक अहम वोटिंग के ज़रिए डायरेक्टर्स को फिर से नियुक्त करने का अप्रूवल मांग रही है। इसमें चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर Mr. Manish Kiri का नाम भी शामिल है, जिन्हें अगले तीन साल के लिए फिर से मौका दिया जा सकता है। यह कदम कंपनी की लीडरशिप में स्थिरता लाने की ओर इशारा करता है, खासकर तब जब कंपनी कई कानूनी लड़ाइयों और फाइनेंशियल चुनौतियों से उबर रही है।
कंपनी के लेटेस्ट नतीजों ने सबको चौंका दिया है। फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के लिए, Kiri Industries ने रेवेन्यू में पिछले साल के मुकाबले 4% की बढ़ोतरी दर्ज की है, जो अब ₹655.67 करोड़ तक पहुंच गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि कंपनी का स्टैंडअलोन EBITDA (Earnings Before Interest, Taxes, Depreciation, and Amortisation) पॉजिटिव हो गया है, जो ₹61.56 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल इसमें बड़ा लॉस था। इसी तरह, PBT (Profit Before Tax) भी ₹0.56 करोड़ के पॉज़िटिव में आ गया है, जो पिछले साल के भारी लॉस से काफी अच्छी रिकवरी है। कंपनी का PAT (Profit After Tax) ₹3.84 करोड़ रहा।
DyStar डील का बड़ा असर
इस ज़बरदस्त फाइनेंशियल रिकवरी का एक बड़ा श्रेय DyStar Global Holdings में कंपनी की हिस्सेदारी से जुड़े एक दशक पुराने कानूनी विवाद के समाधान को जाता है। इस डील के तहत Kiri Industries ने अपनी हिस्सेदारी लगभग US$689 मिलियन (लगभग ₹5,733 करोड़) में बेची है। इस सेटलमेंट से कंपनी को न सिर्फ़ मोटी रकम मिली है, बल्कि लंबे समय से चल रहे लीगल खर्चों से भी छुटकारा मिला है, जिसने कंपनी के परफॉरमेंस पर भारी दबाव डाला हुआ था।
पिछला ट्रैक रिकॉर्ड और भविष्य की राह
हालांकि, कंपनी का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड भी जानना ज़रूरी है। अक्टूबर 2018 में, Kiri Industries और उसके प्रमोटर्स, जिनमें Manish Kiri भी शामिल थे, ने SEBI (Securities and Exchange Board of India) के साथ एक केस सेटल किया था। इस सेटलमेंट में कंपनी और प्रमोटर्स ने डिस्क्लोजर में गड़बड़ी से जुड़े आरोपों के लिए करीब ₹11 लाख का भुगतान किया था। यह मामला शेयरधारकों के लिए एक गवर्नेंस चिंता का विषय रहा है, हालांकि यह वर्तमान फाइनेंशियल टर्नअराउंड और लीडरशिप री-अपॉइंटमेंट से पहले का है।
मैनेजमेंट को उम्मीद है कि आने वाले समय में कंपनी की प्रोडक्टिविटी और प्रॉफिटेबिलिटी में लगातार बढ़ोतरी होगी। इसके लिए कॉस्ट कंट्रोल, प्रोडक्ट मिक्स ऑप्टिमाइजेशन और वॉल्यूम ग्रोथ पर फोकस किया जा रहा है। लीगल प्रोसीडिंग्स के खत्म होने और डिसइन्वेस्टमेंट के पैसे मिलने से मैनेजमेंट अब अपने कोर बिजनेस ऑपरेशंस और नए अवसरों पर ज़्यादा ध्यान केंद्रित कर सकेगा।