केन्याई राष्ट्रपति विलियम रुटो ने Tata Chemicals को अपने Lake Magadi प्लांट का कामकाज पूरी तरह बंद करने का निर्देश दिया है। स्थानीय निवेश की कमी का हवाला देते हुए सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले से कंपनी की सोडा ऐश सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ सकता है।
केन्याई राष्ट्रपति विलियम रुटो का यह आधिकारिक आदेश कंपनी और सरकार के बीच चल रहे विवाद को नई ऊंचाई पर ले आया है। इससे पहले 28 जुलाई, 2026 को वहां के माइनिंग मंत्रालय ने खनन और निर्यात गतिविधियों पर अस्थायी रोक लगाई थी। केन्या सरकार का आरोप है कि टाटा केमिकल्स स्थानीय स्तर पर ग्लास और केमिकल प्लांट लगाने की निवेश शर्तों को पूरा करने में विफल रही है।
कंपनी का पक्ष और महत्व
टाटा केमिकल्स ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि वे स्थानीय कानूनों का पालन कर रहे हैं और अधिकारियों द्वारा मांगी गई सभी जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं। 1911 से संचालित और 2005 में टाटा समूह द्वारा अधिग्रहित यह साइट 'नेचुरल सोडा ऐश' का बड़ा केंद्र है। यह मटेरियल ग्लास, डिटर्जेंट और वाटर ट्रीटमेंट इंडस्ट्री के लिए बहुत अहम है।
निवेशकों के लिए जोखिम
यह विवाद कंपनी के लिए बड़ी अनिश्चितता पैदा कर रहा है। केन्या सरकार का प्लांट को किसी अन्य पार्टनर को सौंपने का विचार स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार पर असर डाल सकता है। कंपनी की अगली बड़ी कानूनी लड़ाई 18 नवंबर, 2026 को केन्या के हाई कोर्ट में तय है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी होंगी।
वित्तीय रूप से देखें तो कंपनी पहले ही मुश्किल दौर से गुजर रही है। 2027 फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही में कंपनी के नेट प्रॉफिट में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। ऐसे में Lake Magadi जैसे मुख्य प्लांट का बंद होना कंपनी के ऑपरेशंस को स्थिर करने की कोशिशों को और कठिन बना सकता है।
